राज्य सरकार का ऐतिहासिक फैसला : कोविंद
मानवाधिकार संरक्षण प्रतिष्ठान का चतुर्थ राष्ट्रीय सम्मेलन में पहुंचे राज्यपाल
राज्यपाल ने उत्पाद नीति को सराहा
विधायकों की एकता को बताया प्रशंसनीय और सांसदों से की सहयोग की अपील
हाजीपुर : संविधान में वर्णित मानव अधिकारों की रक्षा करके की भारतीय गणतंत्र को सशक्त और दीर्घायु बनाया जा सकता है. मानवाधिकार के प्रति हर शख्स को संवेदनशील होना चाहिए और इसके लिए हमारे दिल में जगह होनी चाहिए. मानवाधिकार सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने यह बातें कही. नगर स्थित बसावन सिंह इंडोर स्टेडियम में रविवार को मानवाधिकार संरक्षण प्रतिष्ठान का चतुर्थ राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ.
सम्मेलन में प्रस्ताव पारित कर सभी राजनीतिक दलों से अपील की गई कि गरीबी के विरुद्ध संघर्ष को महज सदभाव के रुप में न देखकर दायित्व के रुप में देखें. गरीबी, असमानता और अभिवंचित समाज के साथ भेदभाव, अत्याचार आदि पर चिंता प्रकट करते हुए इन मुद्दों पर प्रस्ताव लिए गए.
नशामुक्त बिहार के लिए अभियान चलाने का संकल्प : इस अवसर पर शराबमुक्त खुशहाल बिहार के लिए शपथ ली गई. लोगों ने नशापान और शराब के खिलाफ अभियान चलाने का संकल्प लिया. सम्मेलन के आरंभ में प्रतिष्ठान के राष्ट्रीय महासचिव प्रो श्याम नारायण चौधरी ने राज्यपाल एवं अन्य अतिथियों का स्वागत करते हुए संगठन द्वारा पिछले वर्षो में किये गये कार्यों की विस्तार से जानकारी दी. मौके पर राज्यपाल श्री कोविंद ने मानवाधिकार जागरण पत्रिका का विमोचन किया.
राज्यपाल एवं अन्य अतिथियों को अंग वस्त्र एवं प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया. महासचिव राम उदार झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया. सम्मेलन में झारखंड के केके झा, पश्चिम बंगाल के निषाद् राजाराम दास, उत्तर प्रदेश के एम जमाल खान, दिल्ली के धर्माचार एवं राष्ट्रीय सचिव बच्चा ठाकुर समेत विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. सम्मेलन की अध्यक्षता पूर्व मुख्यमंत्री डॉ जगन्नाथ मिश्र ने की. संचालन सुधीर कुमार शुक्ला एवं उमेश कुमार निराला ने किया.
इन मुद्दों पर हुई चर्चा और लिए गए प्रस्ताव : गरीबी और गरीबों के अधिकारों पर चर्चा करते हुए कहा गया कि जीवन जीने का अधिकार, भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा, काम के अवसर और भेदभाव से मुक्ति का अधिकार गरीबों की सबसे बड़ी जरुरत है. गरीबों के इन अधिकारों की रक्षा के लिए क्रियाशील होना हमारा नैतिक दायित्व है.
यदि हम मानवाधिकारों के प्रति गंभीर हैं, तो हमें वचन और कर्म में समानता लानी होगी. दूसरे प्रस्ताव में संवैधानिक प्रावधानों के बावजूद दलितों की अवस्था में बदलाव नहीं आने पर चिंता व्यक्त की गई. कहा गया कि कानूनी प्रावधानों के बावजूद सामाजिक अन्याय और अनुसूचित जातियों, जनजातियों एवं अत्यंत पिछड़े तबकों का शोषण जारी है.
दलित और महिलाओं के अधिकार पर दिया गया जोर : दलित और खासकर इस वर्ग की महिलाएं बुनियादी अधिकारों से वंचित है. तीसरे प्रस्ताव में वृद्ध जनों समस्याओं पर प्रकाश डाला गया और उनकी देखभाल, स्वास्थ्य एवं अन्य समस्याओं के निदान के लिए आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता बताई गई.
चौथे प्रस्ताव में महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए संविधान में महिलाओं को दिये गये अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की बात कही गई. पांचवे प्रस्ताव में विकलांगों की दशा-दिशा और उनके संरक्षण व सुविधाओं तथा छठे प्रस्ताव में सुशासन में संवैधानिक वैद्यता, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निष्पक्ष चुनाव, पारदर्शिता, भ्रष्टाचार रहित शासन तंत्र आदि की चर्चा की गयी.
शराबमुक्त खुशहाल बिहार के लिए लिया सामूहिक संकल्प : सम्मेलन में प्रतिष्ठान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ जगन्नाथ मिश्र ने शराबमुक्त खुशहाल बिहार के लिए उपस्थित जनों को शपथ दिलाई.
कहा गया कि गांधी जी ने बिहार के चंपारण से आजादी का आंदोलन शुरू किया था. उनके सत्याग्रह का यह शताब्दी वर्ष है. शराब छोड़ने का इससे बेहतर कोई अवसर नहीं हो सकता. लोगों ने शपथ ली कि अब से मैं न शराब पिऊंगा न हीं किसी को पीने दूंगा. मैं पूरी निष्ठा और समर्पण से यह प्रयास करूंगा कि मेरे संपर्क में आने वाले लोग शराब से दूर रहें. लोगों ने यह भी शपथ ली कि मैं अपनी आगे की पूरी जिंदगी शराब के विरुद्ध अभियान को समर्पित करता हूं.
सरकार की नयी उत्पाद नीति स्वागतयोग्य : हाजीपुर/लालगंज. राज्य सरकार द्वारा घोषित नयी उत्पाद नीति का लोगों ने खुले दिल से स्वागत किया है. शहर के बसावन सिंह इनडोर स्टेडियम में आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने कहा कि राज्य सरकार की उत्पाद नीति का देश के दूसरे हिस्सों में भी स्वागत हो रहा है. इस मामले में विधायकों की एकता की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यदि सासंद भी इसी तरह का प्रयास करें,
तो देश में एक नयी संस्कृति का प्रसार होगा. दो दिन पूर्व देशी शराब को प्रतिबंधित करने के बाद राज्य सरकार द्वारा की गयी इस घोषणा का स्वागत करते हुए नेताओं ने कहा है कि इस नीति का दूरगामी असर होगा और समाज के निम्न वर्ग का तेजी से विकास होगा. जदयू के जिलाध्यक्ष विनोद कुमार राय ने कहा कि देशी शराब बंद होने के बाद लोग ताड़ी को विकल्प बना रहे थे, जिससे सरकार की नीति प्रभावित हो रही थी.
उन्होंने कहा कि शराब और ताड़ी पर प्रतिबंध लागू होने से न केवल लोगों का स्वास्थ्य व्यय घटेगा, बल्कि बचत की राशि से उनका विकास भी होगा. नशे की समाप्ति से पारिवारिक कलह पर अंकुश लगेगा और अपराध का आंकड़ा भी घटेगा. निर्णय का स्वागत करनेवालों में पूर्व प्रदेश महासचिव संजय कुमार गिरि, विजय सहनी, श्रमिक प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष जीवनाथ सिंह, मुंशी प्रसाद सिंह, विजय सिंह, मुन्ना अंसारी, विजय कुमार श्रीवास्तव, कामेश्वर झा, चौधरी आप्तमान अभय आदि प्रमुख हैं.
