नल से जल्द ही टपकेगा शुद्ध पानी
शहर में वर्षों से अधर में पड़ी पाइप लाइन विस्तार की योजना पर जल्दी ही काम शुरू होने वाला है. नगर पर्षद को जलापूर्ति के लिए प्रथम किस्त के रूप में 40 करोड़ रुपये का आवंटन प्राप्त हो चुका है. नगर विकास विभाग ने बिहार राज्य जल पर्षद के माध्यम से यह कार्य कराने का निर्णय लिया है. वह दिन दूर नहीं,
जब नगर पर्षद से लोगों की यह शिकायत जाती रहेगी कि उन्हें पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं है. नगर के निवासियों को पेयजल की समस्या से निजात मिलने वाली है. पीने के पानी की सुविधा से अभी तक वंचित नगर क्षेत्र की 70 फीसदी आबादी के लिए अच्छी खबर है कि जलापूर्ति योजना को पूरा करने की तैयारी शुरू हो गयी. अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन के तहत आधारभूत संरचना के विकास तथा नागरिकों को बुनियादी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए नगर में पानी सप्लाइ सुनिश्चित करने के काम को प्राथमिकता में शामिल किया गया है.
घरों तक पीने का शुद्ध पानी पहुंचाने के लिए खर्च होंगे 80 करोड़ रुपये
प्रथम किस्त के रूप में नगर पर्षद को 40 करोड़ रुपये का आवंटन प्राप्त
नगर क्षेत्र में घरों को वाटर सप्लाइ योजना का तैयार हो चुका है डीपीआर
कार्य एजेंसी द्वारा इस काम के लिए शीघ्र ही निकाला जायेगा टेंडर
हाजीपुर : नगर के निवासियों को पेयजल की समस्या से निजात मिलने वाली है. पीने के पानी की सुविधा से अभी तक वंचित नगर क्षेत्र की 70 फीसदी आबादी के लिए अच्छी खबर है कि जलापूर्ति योजना की तैयारी शुरू हो गयी. वर्षों से अधर में पड़ी पाइप लाइन विस्तार की योजना पर जल्दी ही काम शुरू होनेवाला है.
नगर पर्षद को जलापूर्ति के लिए प्रथम किस्त के रूप में 40 करोड़ रुपये का आवंटन प्राप्त हो चुका है. नगर विकास विभाग ने बिहार राज्य जल पर्षद के माध्यम से यह कार्य कराने का निर्णय लिया है. वह दिन दूर नहीं, जब नगर पर्षद से लोगों की यह शिकायत जाती रहेगी कि उन्हें पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं है.
अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन के तहत आधारभूत संरचना के विकास तथा नागरिकों को बुनियादी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए नगर में पानी सप्लाइ सुनिश्चित करने के काम को प्राथमिकता में शामिल किया गया है.
योजना का डीपीआर तैयार, आगे की प्रक्रिया शुरू : नगर में हर घर तक पीने का पानी पहुंचाने के लिए फिलहाल 80 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे. नगर पर्षद के सभापति हैदर अली ने बताया कि इसमें 40 करोड़ की पहली किस्त मिल चुकी है.
नगर कार्यपालक पदाधिकारी कुमारी हिमानी द्वारा दी गयी जानकारी के मुताबिक नगर में वाटर सप्लाइ योजना का डीपीआर तैयार हो चुका है. निकट भविष्य में कार्य एजेंसी द्वारा इस काम के लिए टेंडर निकाला जायेगा. इसकी प्रक्रिया चल रही है.
चूंकि यह एक बड़ा प्रोजेक्ट है, जिसे नगर पर्षद अपने संसाधन के बूते पूरा नहीं करा सकता. इसलिए राज्य के नगर विकास एवं आवास विभाग ने अपनी एक एजेंसी बिहार राज्य जल पर्षद को यह कार्य सौंपा है. बिराजप ने इस प्रोजेक्ट को अंजाम देने के लिए नगर को पांच जोन में बांट कर कार्य योजना तैयार की है.
ठंडे बस्ते में पड़ी थी पाइप लाइन बिछाने की योजना : नगर क्षेत्र में लगभग 45 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाने की योजना वर्षों से अधर में थी. इसके कारण दर्जनों मोहल्ले और कॉलोनियों के लोग जलापूर्ति की सुविधा से अभी तक वंचित हैं. नगर के 39 में लगभग 20 वार्ड ऐसे हैं, जहां लोगों को पाइप लाइन बिछाये जाने का बेसब्री से इंतजार है.
नगर में पेयजल संकट का आलम यह है कि गर्मी के दिनों में यहां लोगों की प्यास बुझाने के लिए सरकार को पानी खरीद कर मोहल्लों में पहुंचाना पड़ता है. लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के दावे पर गौर करें तो बीते वर्षों में गर्मी के मौसम में दो लाख रुपये का पानी खरीद कर टैंकरों से मोहल्लों तक पहुंचाया गया था. इससे नगर क्षेत्र में पेयजल संकट की विकरालता का पता चलता है.
क्या कहते हैं पदाधिकारी
वाटर सप्लाइ योजना का डीपीआर तैयार हो चुका है. निकट भविष्य में कार्य एजेंसी द्वारा इस काम के लिए टेंडर निकाला जायेगा. इसकी प्रक्रिया चल रही है. फिलहाल 80 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे. इसमें 40 करोड़ की पहली किस्त मिल चुकी है.
कुमारी हिमानी, कार्यपालक
पदाधिकारी, नगर पर्षद
जलापूर्ति से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य
19.65 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले नगर पर्षद क्षेत्र की आबादी दो लाख के करीब है.
प्रतिदिन नगर क्षेत्र के लोगो को 11 से 12 मिलियन लीटर पानी की आवश्यकता है.
शहर में सरकारी साधन के अभाव में लोग अब भी पानी की भारी किल्लत झेल रहे हैं.
पानी की जरूरत पूरी करने के लिए नगर पर्षद ने लगभग 13 करोड़ रुपये खर्च किये.
पीएचइडी ने 12 करोड़ 47 लाख रुपये की लागत से नगर क्षेत्र में आठ जल मीनारें बनायीं.
विभाग ने जलापूर्ति पंप चेंबर का निर्माण एवं कुछ पाइप लाइन विस्तार के कार्य किये.
नगर पर्षद ने 13 वें वित्त आयोग की अनुदान राशि से 37 लाख से चापाकल लगाये.
इसके बावजूद लगभग शहर की 70 फीसदी आबादी पेयजल की सुविधा से दूर है.
पानी टंकियों के मेन पाइप लगे लेकिन ब्रांच पाइप नहीं बिछने से घरों में नहीं पहुंचा पानी.
नगर क्षेत्र के युसुफपुर में चार वर्षों पूर्व बनी जलमीनार अब तक चालू नहीं हो सकी.
टेस्टिंग के दौरान बोरिंग फेल होने के कारण यह बनने के बाद से ही हो गया है बंद.
