हाजीपुर : लालगंज बाजार में भड़के जनाक्रोश ने न केवल एक युवक की जान ले ली, बल्कि इस जिले के एक कर्तव्यनिष्ठ पुलिस पदाधिकारी बेलसर ओपी के प्रभारी की भी जान ले ली. आक्रोशित नागरिकों का आरोप था कि पुलिस ने आरोपित चालक के परिजनों को भगाने में सहयोग किया और इसी कारण उपजे जन आक्रोश के वे शिकार हो गये.
इसके पूर्व भी कई पुलिस पदाधिकारी हुए हैं शिकार : इसके पूर्व गत वर्ष जनवरी में जिले के जुड़ावनपुर थाने के थानाध्यक्ष की हत्या हो गयी थी. इस हत्या का आरोप एक ठेकेदार पर था. लगभग डेढ़ दशक पूर्व आक्रोशित लोगों ने राजापाकर थाने को तब आग के हवाले कर दिया था, जब एक व्यक्ति ने हत्या कर अपने-आपको पुलिस के हवाले कर दिया और आक्रोशित लोग हत्यारे को अपने हवाले करने की मांग कर रहे थे.
पुलिस द्वारा इसमें अपनी अक्षमता जताये जाने पर न केवल थाने को आग के हवाले कर दिया गया बल्कि पुलिसवालों के साथ मारपीट भी की गयी थी. वर्ष 2014 में एक दलित छात्रा के साथ बलात्कार के दोषी के विरुद्ध कार्रवाई में शिथिलता बरते जाने का आरोप लगाते हुए
आक्रोशित लोगों ने थाने को आग के हवाले कर दिया था तथा पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की थी. लालगंज में दो वर्ष पूर्व रेफरल अस्पताल में प्रसव के दौरान बच्चा-जच्चा की मौत के बाद आक्रोशित लोगों ने न केवल अस्पताल को आग के हवाले कर दिया था बल्कि पुलिसवालों के साथ भी मारपीट की थी.
