सुविधाओं का अभाव झेल रहे नगर के वाहन पड़ाव

हाजीपुर : पिछले तीन दशक के दौरान हाजीपुर शहर बेशक, तरक्की की कई सीढ़ियां चढ़ चुका है. विकास की यात्रा में यह शहर चाहे जिस मुकाम पर पहुंच गया हो, लेकिन यात्रियों की सुविधा के मामले में आज भी पुरानी स्थिति में है. नगर में आधा दर्जन से अधिक वाहन पड़ाव हैं, पर किसी स्टैंड […]

हाजीपुर : पिछले तीन दशक के दौरान हाजीपुर शहर बेशक, तरक्की की कई सीढ़ियां चढ़ चुका है. विकास की यात्रा में यह शहर चाहे जिस मुकाम पर पहुंच गया हो, लेकिन यात्रियों की सुविधा के मामले में आज भी पुरानी स्थिति में है. नगर में आधा दर्जन से अधिक वाहन पड़ाव हैं, पर किसी स्टैंड में कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है.

प्रभात खबर की पड़ताल में वाहन पड़ावों की दशा काफी दयनीय दिखी. हम यहां प्रस्तुत कर रहे है पहली कड़ी में रामअशीष चौक स्थित नगर के सबसे बड़े वाहन पड़ाव का हाल ़ नगर क्षेत्र में लगभग आधा दर्जन वाहन पड़ाव हैं, लेकिन किसी भी पड़ाव में यात्रियों के बैठने तक की भी व्यवस्था नहीं है. गर्मी हो या बरसात, खुले आसमान के नीचे घंटों खड़े होकर यहां वाहन का इंतजार करना यात्रियों की नियति बन गयी है. शहर के रामअशीष चौक पर स्थित परिवहन निगम का बस पड़ाव हो या प्राइवेट बस स्टैंड, कहीं भी न यात्री शेड, न पेयजल और न ही शौचालय की सुविधा. शहर के किसी भी वाहन पड़ाव पर चिलचिलाती धूप का सामना करते हुए बेहाल यात्रियों को आप देख सकते हैं.

राज्य की राजधानी से सटा यह शहर उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार का संधि स्थल है. हर रोज हजारों यात्री यहां से अपने गंतव्य को जाने के लिए वाहन पकड़ते हैं. नगर के जागरूक लोगों का कहना है कि विकास की यात्रा में हाजीपुर शहर चाहे जिस मुकाम पर पहुंच गया हो, लेकिन यात्रियों की सुविधा के मामले में यह शहर आज भी निठल्ला है.

सड़क पर खड़े होकर करते हैं वाहन की प्रतीक्षा : नगर के रामअशीष चौक पर बिहार राज्य पथ परिवहन निगम का बस पड़ाव है. यहां से यात्री उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर, शिवहर, मोतिहारी, दरभंगा, समस्तीपुर समेत अन्य जिलों के लिए बसे पकड़ते हैं. निगम का यह बस पड़ाव आवारा पशुओं का आरामगाह बनता जा रहा है. यहां यात्रियों के लिए कोई भी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है. मजबूरन यात्रियों को वाहन के इंतजार में सड़क पर ही खड़ा रहना पड़ता है. हालांकि दशकों पहले रेलवे स्टेशन के समीप कभी परिवहन निगम का डिपो हुआ करता था. उस बस डिपो में यात्री शेड, बैठने की सुविधा से लेकर अन्य प्रकार की सुविधा उपलब्ध थी. डिपो बंद होने के बाद अब हाल यह है कि बस पड़ाव तो है, लेकिन बस की प्रतीक्षा करने के लिए यात्रियों के बैठने का भी इंतजाम नहीं है.
निजी वाहन पड़ाव में भी कोई सुविधा नहीं : नगर के रामअशीष चौक को उत्तर बिहार का प्रवेश द्वार कहा जाता है. यहां से विभिन्न दिशाओं के लिए रोजाना सैकड़ों वाहन खुलते हैं. यहां से रांची, टाटा, बोकारो और उत्तर दिशा की ओर पूर्णिया, मधुबनी, चंपारण, रक्सौल सहित अन्य स्थानों के लिए लंबी दूरी की प्राइवेट बसे खुलती हैं. इसके अलावे रामआशीष चौक स्टैंड से ही महुआ, महनार, जंदाहा, पातेपुर, ताजपुर समेत अन्य दर्जनों जगहों के लिए बसे और मिनी बसे चलायी जाती हैं. इसी स्टैंड से हाजीपुर-पटना रिंग सर्विस की बसे खुलती हैं. यात्रियों की बड़ी संख्या के बावजूद यहां यात्री सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं. एक शेड तक नहीं.
महिला यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी
नगर के किसी भी वाहन पड़ाव पर यात्रियों की सुविधा का इंतजाम न होने से महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी है. महिलाओं के लिए सबसे बड़ी आफत शौचालय की व्यवस्था नहीं होने के कारण है. शेड के अभाव में महिला यात्रियों को गर्मी में धूप से तप कर और बारिश के दिनों में पानी में भीग कर वाहन की प्रतीक्षा करनी पड़ती है. पेयजल का साधन नहीं होने के परेशानी का सामना करना पड़ता है.
क्या कहते हैं अधिकारी
नगर का रामअशीष चौक वाहन पड़ाव नगर पर्षद क्षेत्र के दायरे से बाहर है. वहां के मामले में जिला प्रशासन या संबंधित विभाग ही कुछ कर सकता है. नगर पर्षद के अधीन जो पड़ाव हैं, उन्हें व्यवस्थित करने पर विचार किया जा रहा है.
सिद्धार्थ हर्ष वर्द्धन, नगर कार्यपालक पदाधिकारी

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