जमीन को लेकर 17 वर्षों से कोर्ट में चल रहा था मामला

हाजीपुर : अधिवक्ता की हत्या के कारणों की महत्वपूर्ण वजह 62 डिसमिल जमीन है. जिसे लेकर कोर्ट में 17 वर्षों से मामला विचाराधीन था. अधिवक्ता राजीव की हत्या के महज एक माह पूर्व उक्त जमीन के विवाद मामले में दोनों पक्षों के बीच सुलहनामा कराया गया था. क्या था मामला : सूत्रों से मिली जानकारी […]

हाजीपुर : अधिवक्ता की हत्या के कारणों की महत्वपूर्ण वजह 62 डिसमिल जमीन है. जिसे लेकर कोर्ट में 17 वर्षों से मामला विचाराधीन था. अधिवक्ता राजीव की हत्या के महज एक माह पूर्व उक्त जमीन के विवाद मामले में दोनों पक्षों के बीच सुलहनामा कराया गया था.

क्या था मामला : सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार स्थानीय अंदर किला मोहल्ला निवासी नारायण परपम उर्फ नन्हा पांडे से 1928 में जनार्दन तिवारी द्वारा बेनामी केवाला अंबिका सिंह के नाम से कराया गया था.
उक्त जमीन को स्व. तिवारी द्वारा जमीन के बंटवारे के तहत अपने भाई और बहन रेशमा देवी के नाम 1975 में एकरारनामा तकसीनामा कराया गया था. मामले में सब जज-7 के यहां वाद संख्या 525/2000 के तहत रामएकबाल सिंह पिता स्व.अंबिका सिंह वगैरह बनाम रेशमा देवी के पुत्र शिव कुमार ओझा व रामकरण ओझा का मामला न्यायालय में विचाराधीन था. इसी मामले को लेकर उक्त भूमि की रख वाली के लिए मुख्य आरोपित जयप्रकाश राय को रखा गया था.
17 वर्षों तक कोर्ट में मामला चलने के बाद दोनों पक्षों के बीच 14 जून 2017 को ग्रामीण शुभचिंतकों ने सुलह- समझौता कराया था. जिसमें रामएकवाल सिंह एवं अन्य पट्टीदारों को छह कठा पांच धूर और दूसरे पक्ष के स्व. शिव कुमार ओझा और स्व.रामकरण ओझा को सात कट्ठा पांच धूर जमीन देकर समझौता कराया गया. यह भी चर्चा है कि रामएकवाल सिंह ने अपने हिस्से से पुत्र अनिल सिंह के साले व अधिवक्ता राजीव कुमार शर्मा को 1 कठ्ठा सवा तीन धूर जमीन बीते 14 जुलाई 2017 को रजिस्ट्री कर दी थी.घटना के दिन इसी जमीन के स्पॉट सत्यापन के दौरान हत्या की उक्त वारदात को आरोपियों ने अंजाम दिया.

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