Tejashwi Yadav : मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विपक्ष को घेरने के कुछ ही घंटों बाद, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मोर्चा संभाल लिया. तेजस्वी ने न केवल मुख्यमंत्री की समझ पर सवाल उठाए, बल्कि सीधा हमला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर करते हुए बिहार सरकार को रिमोट कंट्रोल से चलने वाली सरकार करार दे दिया.
बिल समझ में आया नहीं और बन गए मुख्यमंत्री
तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर पलटवार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पद की शपथ तो उन्होंने ले ली है, लेकिन महिला आरक्षण बिल की हकीकत उनकी समझ से परे है. तेजस्वी ने तंज कसते हुए कहा, “बिल 3 साल पहले पास हुआ था, तो अब तक राष्ट्रपति से हस्ताक्षर कराकर इसे लागू क्यों नहीं किया गया?” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महिलाओं की आड़ में असल में डीलिमिटेशन (परिसीमन) का खेल खेलना चाहती है, ताकि अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकी जा सकें.
बिहार को चलाने गुजरात से आ रहे लोग
तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की कार्यशैली पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि बिहार में अब स्वायत्त शासन खत्म हो चुका है. उन्होंने विवादित बयान देते हुए कहा, “मुख्यमंत्री जो भी करेंगे, वही करेंगे जो उनके गुजराती भाई कहेंगे. बिहार को चलाने के लिए सीधे PMO (प्रधानमंत्री कार्यालय) से लोग भेजे जा रहे हैं.” तेजस्वी के मुताबिक, दो लोग जो चाहेंगे, वही बिहार में होगा, जिससे राज्य की अस्मिता और संघीय ढांचे को खतरा पैदा हो गया है.
तेजस्वी का गंभीर आरोप
आरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए तेजस्वी ने भाजपा और आरएसएस की विचारधारा पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि एक तरफ ये लोग महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं और दूसरी तरफ आरएसएस के लोग महिलाओं से पैर धुलवाते हैं.
तेजस्वी ने दावा किया कि राजद ने हमेशा महिलाओं को सबसे ज्यादा टिकट देकर उन्हें सशक्त बनाया है.उन्होंने मांग की कि अगर भाजपा वाकई गंभीर है, तो महिलाओं का आरक्षण 33% नहीं बल्कि 50% कर देना चाहिए.
तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी निशांत कुमार के बयान पर भी कटाक्ष किया. उन्होंने कहा कि जब नीतीश जी ने खुद ‘ट्रिपल सी’ करप्शन, क्राइम, कम्युनलिज्म से समझौता कर लिया है, तो उनके बेटे की बातों का क्या मतलब? तेजस्वी ने भाजपा को कम्युनल पार्टी बताते हुए कहा कि आज यूपी और बिहार में क्राइम रेट सबसे ऊपर है, लेकिन सरकार केवल आंकड़ों की बाजीगरी में जुटी है. उन्होंने साफ किया कि विपक्ष महिला आरक्षण का विरोधी नहीं है, बल्कि उस डीलिमिटेशन की साजिश के खिलाफ है जो पिछड़ों और अति-पिछड़ों के हक को मारने के लिए लाया जा रहा है.
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