अस्ताचलगामी सूर्य की आराधना आज

बाजार में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

– खरना पूजा के साथ ही शुरू हुआ व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास, चहुंओर बज रहे छठ गीत से भक्तिमय है माहौल – छठ घाट पर सजावट को अंतिम रूप देने में जुटे श्रद्धालु – उदीयमान भगवान भाष्कर को अर्घ देने के बाद संपन्न होगा महापर्व – बाजार में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, व्रतियों ने पूजन सामग्री की खरीददारी – संध्याकाल अर्घ्य का समय 05 बजकर 34 मिनट – सुबह 06 बजकर 26 मिनट पर भगवान सूर्य को दिया जायेगा अर्घ्य सुपौल. सूर्योपासना व लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ पूजा के दूसरे दिन रविवार को छठ व्रतियों ने खरना पूजा की. इस दौरान व्रतियों ने विधि पूर्वक अपने हाथों से तैयार किया हुआ गेहूं व चावल के आटे से पकवान तैयार किया. व्रतियों ने दिन भर उपवास रखकर संध्याकाल में विधि-विधान से पूजा-अराधना कर भगवान का भोग लगाकर पूरे परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण किया. खरना पूजा संपन्न होने के साथ ही छठ व्रतियों का करीब 36 घंटे का निर्जला उपवास प्रारंभ हो गया. जो मंगलवार की सुबह सूर्य को अर्घ देने के बाद समाप्त होगा. छठ पूजा के तीसरे दिन सोमवार को अस्ताचलगामी सूर्य की आराधना की जायेगी. वहीं मंगलवार की सुबह उदीयमान भगवान भास्कर की पूजा एवं उन्हें अर्घ देने के उपरांत चार दिवसीय छठ महापर्व संपन्न होगा. बहरहाल लोक आस्था के महापर्व छठ को लेकर बाजार में रौनक बढ़ गयी है. लाउडस्पीकरों पर बजते छठी मैया की गीतों से माहौल छठमय बना हुआ है. बाजार में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ छठ महापर्व को लेकर रविवार को मुख्यालय बाजार में पर्व से जुड़ी सामग्रियों की खरीदारी के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. बाजार में महावीर चौक, स्टेशन चौक, उत्तरी व दक्षिणी हटखोला रोड, लोहिया नगर चौक समेत अन्य जगहों पर सड़क किनारे पूजन सामग्री, फल, मिट्टी के बर्तन, कंद-मूल व शृंगार की सैकड़ों दुकानें सजी थी. उत्तरी हटखोला रोड में केले की मंडी व स्टेशन परिसर में कंद-मूल का बाजार सजा था. वहीं सुबह से ही दूध के काउंटरों पर भी लोगों की भीड़ लगी रही. घाटों की तैयारी व सजावट में जुटे थे लोग चार दिवसीय छठ पूजा को लेकर सभी छठ घाटों पर तैयारी को अंतिम रूप दिया जा रहा है. घाटों को साफ-सफाई के बाद उसे सजाया जा रहा था. वहीं कई जगहों पर पांडाल व गेट भी बनाए गये है. जिला प्रशासन द्वारा सभी चिह्नित घाटों पर आवश्यक नागरिक सुविधा एवं सुरक्षा व्यवस्था का आदेश दिया गया है. जिसके तहत घाटों पर रौशनी, गोताखोर, साफ-सफाई, कपड़े बदलने की जगह आदि सुनिश्चित करने का निर्देश है. मुख्यालय स्थित गांधी मैदान तालाब में पानी के अंदर बैरिकेटिंग व घाट पर कपड़े बदलने का स्थान बनाया गया था. अन्य कई घाटों पर भी गहरे पानी में घेराबंदी की गयी है. व्रती व उनके परिजनों द्वारा अपने-अपने घाटों की साज-सजावट व उसे रौशन करने का इंतजाम किया जा रहा था. खतरनाक घाट पर एनडीआरएफ की रहेगी तैनाती विभिन्न छठ घाटों पर भ्रमण कर छठ की तैयारियों का जायजा अनुमंडल पदाधिकारी इंद्रवीर कुमार द्वारा लिया गया. इसी क्रम में विभिन्न घाटों पर एनडीआरएफ की तैनाती का भी अवलोकन किया गया. गहरे घाटों पर एनडीआरएफ की तैनाती की गई है. किसी भी आपदा की स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ की टीम सुपौल पहुंच गई है. पर्व को लेकर बाजार में काफी भीड़ देखी गयी. वाहन की बात तो छोड़ दें, लोगों को पैदल चलने में समस्या हो रही थी. ई-रिक्सा के गलत दिशा में परिचालन से वाहन चालक काफी परेशान दिखे. पूरे शहर की सड़कों पर जाम लगता रहा. सिद्ध और अमृत योग में मनाया जा रहा छठ महापर्व सूर्योपासना का महापर्व छठ इस वर्ष शुभ योगों में संपन्न होगा. आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र ने कहा कि इस बार छठ पर्व की सभी तिथियां सिद्ध और अमृत योग में पड़ रही हैं, जिसे अत्यंत शुभ माना गया है. कहा कि इस बार 25 अक्टूबर, शनिवार को सिद्ध योग में “नहाय-खाय” से छठ पर्व का शुभारंभ हुआ. इसके बाद 26 अक्टूबर, रविवार को अमृत योग एवं सर्वार्थ सिद्ध योग में खरना (प्रतिहार षष्ठी व्रत का खरना) संपन्न हुआ. कहा कि सायंकालीन और प्रातःकालीन अर्घ्य के समय 27 अक्टूबर, सोमवार को सिद्ध योग में संध्या अर्घ्य दिया जाएगा. अर्घ्य का समय संध्याकाल 05 बजकर 34 मिनट निर्धारित है. 28 अक्टूबर, मंगलवार को अमृत योग में प्रातःकालीन अर्घ्य सुबह 06 बजकर 26 मिनट पर भगवान सूर्य को समर्पित किया जाएगा. इसके बाद पारण के साथ व्रत का समापन होगा. कहा कि वैदिक परंपरा के अनुसार, सूर्य देव की दो शक्तियां उषा (प्रातःकाल की किरण) और प्रत्यूषा (संध्याकाल की किरण) मानी जाती हैं. छठ में दोनों की संयुक्त आराधना होती है. श्रद्धालु संध्या में प्रत्यूषा और प्रातः में उषा को अर्घ्य देकर सूर्य देव का नमन करते हैं, जिससे जीवन में सुख, समृद्धि और संतान-सौभाग्य की प्राप्ति होती है.

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