बढ़ रहा तापमान : मौसम परिवर्तन के लिए प्रकृति नहीं, हम खुद भी हैं जिम्मेदार

धड़ल्ले से काटे जा रहे हरे-भरे पेड़, तालाब को भर बनाये जा रहे भवन

By RAJEEV KUMAR JHA | May 13, 2025 6:16 PM

– धड़ल्ले से काटे जा रहे हरे-भरे पेड़, तालाब को भर बनाये जा रहे भवन- 1990 से पहले जिले में मात्र 250 किमी पीडब्ल्यूडी की थी सड़कें

– 33 साल में बढ़कर हो गया 1100 किमी सड़कें

सुपौल. कोसी अंचल के सुपौल जिले में चिलचिलाती धूप और तापमान में लगातार हो रही रिकॉर्ड वृद्धि ने जनजीवन को प्रभावित किया है. लोग गर्मी से बेहाल होकर ईश्वर को कोसने लगे हैं, मगर विशेषज्ञों का मानना है कि इसके लिए केवल प्रकृति नहीं, बल्कि हमारी अपनी नीतियों और कार्यशैली भी जिम्मेदार हैं. कभी हरियाली और तालाबों से भरपूर दिखने वाला सुपौल अब शहरीकरण की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहा है. हरे-भरे पेड़ों की जगह अब ऊंची-ऊंची इमारतें नजर आने लगी हैं. जगह-जगह बन रही पक्की सड़कों, एसी के बढ़ते इस्तेमाल और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के कारण जिले का तापमान दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है.

सड़कों के विस्तार ने छीनी हरियाली

जानकार बताते हैं कि वर्ष 1990 से पहले सुपौल में जहां मात्र 150 किमी की पीडब्ल्यूडी सड़कें थीं, वहीं अब यह आंकड़ा 850 किमी तक पहुंच चुका है. इसके अलावा 250 किमी एनएच की सड़कें भी बन चुकी हैं. इन निर्माण कार्यों में बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए हैं, जो वातावरण के संतुलन के लिए बेहद जरूरी थे.

पेड़ काटने से बिगड़ रहा पर्यावरण संतुलन

वृक्षों की कटाई को जलवायु परिवर्तन का एक बड़ा कारण माना जा रहा है. पेड़ न केवल फल और छाया देते हैं, बल्कि कार्बन डाइऑक्साइड जैसी घातक गैसों को अवशोषित कर वातावरण को शुद्ध भी करते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि वृक्ष प्रकृति के ऐसे उपकरण हैं, जो वायुमंडलीय प्रदूषण को नियंत्रित करते हैं. इनके नष्ट होने से तापमान में असामान्य वृद्धि हो रही है.

जल प्रबंधन और नैसर्गिक व्यवस्था में असंतुलन

जल विशेषज्ञ भगवान जी पाठक के अनुसार, पहले कोसी क्षेत्र की नदियां, पोखर और झीलें आपस में जुड़ी रहती थीं, जिससे प्राकृतिक जलविनिमय बना रहता था. लेकिन तटबंधों और अवैज्ञानिक विकास ने इस संतुलन को तोड़ दिया है. उन्होंने कहा कि हमारा जल प्रबंधन प्रकृति और विज्ञान दोनों के अनुरूप होना चाहिए.

इस वर्ष का सबसे अधिक तापमान दर्ज

अगवानपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक देवन कुमार चौधरी ने बताया कि इस साल 09 मई को अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो पिछले पांच वर्षों में इस तिथि पर सबसे अधिक है. वहीं न्यूनतम तापमान 22.05 डिग्री सेल्सियस रहा. उन्होंने लोगों को हिट वेव से बचने के लिए दोपहर के समय घरों में रहने और धूप से बचाव की सलाह दी. कहा कि मंगलवार को जिले का अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया.

समय रहते चेतने की है जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते पौधारोपण और पर्यावरण संतुलन की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में स्थिति और भी भयावह हो सकती है. विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी गंभीरता से ध्यान देना अब हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए.

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