उड़नखटोला से गूंजा आसमान, महिलाओं की भागीदारी से लोकतंत्र की नयी उड़ान

बुजुर्ग मतदाता अपने अनुभव के आधार पर राजनीतिक चर्चा में हैं मशगूल

सुपौल. द्वितीय चरण के तहत 11 नवंबर को जिले के पांच विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले चुनाव को लेकर पूरे इलाके में चुनावी सरगर्मी चरम पर है. दलीय और निर्दलीय सभी प्रत्याशी अपने-अपने स्तर पर जनसंपर्क अभियान में जुट गये हैं. कहीं रोड शो हो रहा है, तो कहीं नुक्कड़ सभाओं में मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की जा रही है. शहरों से लेकर गांवों तक हर तरफ चुनावी रौनक छायी हुई है. प्रत्याशियों के काफिले सड़कों पर दौड़ रहे हैं, तो वहीं जगह-जगह उड़नखटोले (हेलीकॉप्टर) की गूंज सुनाई देने लगी है. जैसे ही किसी प्रत्याशी का उड़नखटोला आसमान में दिखाई देता है, लोग अपने घरों से निकलकर देखने दौड़ पड़ते हैं. बुजुर्ग मतदाता अपने अनुभव के आधार पर राजनीतिक चर्चा में हैं मशगूल बच्चों में इसे देखने को लेकर खासा उत्साह है, जबकि बुजुर्ग मतदाता अपने अनुभव के आधार पर राजनीतिक चर्चा में मशगूल नजर आ रहे हैं. चुनावी सभाओं में भारी भीड़ उमड़ रही है. खासकर महिलाओं की भागीदारी इस बार उल्लेखनीय है. बड़ी संख्या में महिलाएं सभा स्थलों पर पहुंचकर नेताओं को सुन रही हैं और अपने मताधिकार को लेकर जागरूकता भी दिखा रही हैं. यह लोकतंत्र के लिए एक शुभ संकेत माना जा रहा है, क्योंकि पहले की तुलना में महिलाओं की राजनीतिक समझ और सहभागिता में जबरदस्त वृद्धि देखी जा रही है. सभी राजनीतिक दल मतदाताओं को लुभाने के लिए पूरी ताकत झोंक चुके हैं. भाजपा, कांग्रेस, राजद, जदयू समेत अन्य दलों के बड़े-बड़े नेता लगातार दौरे पर हैं और सभा कर रहे हैं. वहीं, निर्दलीय उम्मीदवार भी किसी तरह पीछे नहीं हैं. सोशल मीडिया से लेकर पोस्टर-बैनर तक, हर माध्यम का उपयोग करके प्रचार को धार दी जा रही है. प्रत्याशी घर-घर जाकर लोगों से मिल रहे हैं, हाथ जोड़कर आशीर्वाद मांग रहे हैं. कई जगहों पर जनसंपर्क यात्रा निकाली जा रही है, जिसमें युवा वर्ग भी सक्रिय रूप से भाग ले रहा है. चुनाव आयोग की सख्ती के बावजूद मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए तरह-तरह की रणनीतियां अपनायी जा रही हैं. चुनावी जोश में डूबा हुआ है पूरा जिला जिले के पांचों विधानसभा क्षेत्र सुपौल, त्रिवेणीगंज, छातापुर, निर्मली और पिपरा में इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है. स्थानीय मुद्दों से लेकर विकास के वादों तक, हर प्रत्याशी अपनी बात को जनता के बीच रख रहा है. चुनावी जोश में पूरा जिला डूबा हुआ है. गली-मोहल्लों में चर्चाओं का दौर जारी है. अब सबकी निगाहें 11 नवंबर पर टिक गयी हैं, जब जनता अपने मताधिकार के जरिए तय करेगी कि अगली पांच साल तक जिले की बागडोर किसके हाथों में होगी.

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