सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज अनुमंडल मुख्यालय स्थित प्रखंड कृषि कार्यालय के सभागार में सोमवार को प्रखंड स्तरीय किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया. कृषि विभाग एवं आत्मा (ATMA), सुपौल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस गोष्ठी का मुख्य विषय "खरीफ फसलों में कीट एवं व्याधि प्रबंधन" रखा गया था.
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ प्रखंड कृषि पदाधिकारी (BAO) नीतीश कुमार, प्रगतिशील किसान राजेन्द्र यादव, सहायक तकनीकी प्रबंधक (ATM) पंकज कुमार, कृषि समन्वयक सुनील कुमार तथा बिहार राज्य किसान सलाहकार संघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अमन कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया.
धान व मक्का में कीट-व्याधि प्रबंधन पर बीएओ ने दिए व्यावहारिक निर्देश
गोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रखंड कृषि पदाधिकारी नीतीश कुमार ने कहा कि किसानों की माली हालत सुधारने और फसलों की पैदावार बढ़ाने के उद्देश्य से इस गोष्ठी का आयोजन किया गया है:
- शीथ ब्लाइट और ब्लास्ट का खतरा: अत्यधिक नमी और मौसमी बदलाव के कारण इस वर्ष धान की फसलों में ब्लास्ट तथा शीथ ब्लाइट रोग का प्रकोप देखा जा रहा है. किसानों को सलाह दी गई कि वे लक्षण पहचानकर तत्काल कृषि वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित दवाओं का ही छिड़काव करें.
- आधुनिक तकनीक का उपयोग: कीट प्रबंधन केवल रासायनिक छिड़काव तक सीमित न रहे, बल्कि इसमें समेकित कीट प्रबंधन (IPM), मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) के आधार पर संतुलित उर्वरक प्रयोग और ड्रोन तकनीक के जरिए छिड़काव को बढ़ावा दिया जाए.
'लैब टू लैंड' अभियान और त्रिवेणीगंज को जैविक मॉडल बनाने का लक्ष्य
सहायक तकनीकी प्रबंधक (ATM) पंकज कुमार ने विभागीय योजनाओं की रूपरेखा साझा की:
- लागत में कमी, गुणवत्ता में इजाफा: आत्मा योजना का मूल उद्देश्य प्रयोगशालाओं (लैब) में विकसित नवीन कृषि तकनीकों को सीधे खेत (लैंड) तक पहुंचाना है.
- जैविक व सुरक्षित खेती: उन्होंने कहा कि विभाग का मुख्य लक्ष्य त्रिवेणीगंज प्रखंड को जैविक और विषमुक्त सुरक्षित खेती का मॉडल बनाना है, जिससे किसानों की उत्पादन लागत घटे और उपज का उचित मूल्य मिल सके.
'किसान का खेत ही सबसे बड़ी फैक्ट्री': अमन कुमार
बिहार राज्य किसान सलाहकार संघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अमन कुमार ने ग्रामीण युवाओं को खेती को उद्यमिता (एग्री-बिजनेस) के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया:
- युवाओं को संदेश: उन्होंने कहा कि युवाओं को नौकरी के पीछे भागने के बजाय आधुनिक खेती पर ध्यान देना चाहिए. किसान का खेत ही उसकी सबसे बड़ी फैक्ट्री है.
- डिजिटल दौर और सब्सिडी: हाथ में स्मार्टफोन, यूट्यूब पर कृषि ज्ञान, वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन और सरकार की भारी सब्सिडी—इन सब साधनों का लाभ उठाकर युवा किसान पारंपरिक खेती को मुनाफे के कारोबार में बदल सकते हैं.
प्रगतिशील किसानों और अधिकारियों की रही सक्रिय मौजूदगी
कार्यक्रम के दौरान प्रगतिशील किसान राजेन्द्र प्रसाद यादव, कृषि समन्वयक सुनील कुमार और अरविन्द कुमार ने सरकारी कृषि अनुदानों व योजनाओं की विस्तारपूर्वक जानकारी दी.
इस मौके पर दिनेश यादव, इंदु यादव, ललित कुमार, रविन्द्र कुमार, प्रभाष सिंह, महेन्द्र यादव, श्रीलाल सरदार, सिंहेश्वर साह और प्रमोद साह सहित दर्जनों किसान तथा कृषि कर्मी उपस्थित रहे.
