दो साल में ठगी के 60 लाख से अधिक की राशि पीड़ितों के खाते में कराई गई रिफंड

विद्यालय, कॉलेज व पंचायत स्तर तक सेमिनार कर पुलिस लोगों को कर रही जागरूक

– साल 2023 में सुपौल में साइबर थाना की हुई थी स्थापना – विद्यालय, कॉलेज व पंचायत स्तर तक सेमिनार कर पुलिस लोगों को कर रही जागरूक – कई मामलों में पुलिस ने बैंक खातों को फ्रीज करा पीड़ितों को दिलाई है राहत – 40 से अधिक ठगी के आरोपी को भी साइबर थाना पुलिस ने किया है गिरफ्तार – सैकड़ों मोबाइल, लैपटॉप, एटीएम कार्ड, पासबुक और सिम कार्ड भी अब तक किए गए जब्त सुपौल. साल 2023 के जून महीने में जिले में साइबर थाना की स्थापना हुई थी. महज दो साल के भीतर यह थाना ना केवल सुपौल बल्कि पूरे कोसी प्रमंडल में एक मिसाल बन गया है. कभी जहां जिले में रोजाना ऑनलाइन ठगी के मामले सुनने को मिलते थे, वहीं आज इस थाना की सक्रियता और दक्षता से लोगों में भरोसा और सुरक्षा की भावना जगी है. साल 2020 के बाद साइबर ठगी के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ. बैंक खातों से रुपए उड़ाने, मोबाइल वॉलेट फ्रॉड, लॉटरी और क्यूआर कोड स्कैन जैसी घटनाएं आम हो गई थीं. इन बढ़ते मामलों को देखते हुए बिहार सरकार ने सभी जिलों में एक स्वतंत्र साइबर थाना की स्थापना की, जिससे तकनीकी जांच के जरिए अपराधियों तक पहुंचना आसान हुआ. साइबर थानाध्यक्ष सह डीएसपी गौरव गुप्ता बताते हैं कि उनका उद्देश्य सिर्फ अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि पीड़ितों की गाढ़ी कमाई को वापस दिलाना भी है. उन्होंने कहा पिछले दो वर्षों में 60 लाख से अधिक राशि पीड़ितों को रिफंड कराई गई है. कई मामलों में अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि कुछ में बैंक और डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म के सहयोग से रकम वापस कराई गई. कहा कि थाना में एक विशेष साइबर सेल गठित है, जिसमें प्रशिक्षित पुलिसकर्मी, तकनीकी विशेषज्ञ और बैंकिंग सिस्टम की गहरी समझ रखने वाले कर्मी तैनात हैं. कहा कि अधिकतर ठग सोशल इंजीनियरिंग तकनीक से लोगों को फंसाते हैं. वे खुद को बैंक प्रतिनिधि, सरकारी अधिकारी या कंपनी कर्मचारी बताकर संवेदनशील जानकारी हासिल कर लेते हैं. उन्होंने कहा बैंक कभी भी फोन पर ओटीपी या खाता विवरण नहीं मांगता है. किसी अजनबी लिंक या क्यूआर कोड पर भरोसा नहीं करें. कहा कि साइबर थाना ने अब तक 10 हजार से अधिक लोगों को जागरूक किया है. विद्यालय, कॉलेज और पंचायत स्तर तक सेमिनार आयोजित किए गए हैं ताकि लोग ठगी से बच सकें. कहा कि साइबर थाना केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं है. यह पीड़ितों को मानसिक और आर्थिक सहायता देने का भी प्रयास करता है. कई मामलों में पुलिस ने तत्काल बैंक खातों को फ्रीज करा पीड़ितों को राहत दिलाई है. वहीं पीड़ित बताते हैं कि पहले वे पुलिस के पास जाने से डरते थे, पर अब उन्हें भरोसा है कि साइबर थाना में शिकायत करने से उन्हें न्याय मिलेगा. अंतरराज्यीय ठगों तक पहुंची सुपौल पुलिस साइबर थानाध्यक्ष सह डीएसपी गौरव गुप्ता बताते हैं कि सुपौल साइबर थाना ने कई अंतरराज्यीय नेटवर्कों तक अपनी जांच पहुंचाई है. झारखंड, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, दिल्ली और असम जैसे राज्यों में फैले गिरोहों का पर्दाफाश किया गया है. इन अभियानों में बिहार पुलिस की विभिन्न इकाइयां, बैंकिंग नोडल अधिकारियों और डिजिटल फोरेंसिक टीमों का सहयोग रहा है. थाना स्थापना के बाद से अब तक कई ठगी के मामलों का हुआ है खुलासा साइबर थानाध्यक्ष सह डीएसपी गौरव गुप्ता ने कहा कि थाना स्थापना के बाद से अब तक कई ठगी के मामले का खुलासा किया गया है. इसमें 40 से अधिक ठगी के आरोपित, 6 लाख से अधिक ठगी की राशि बरामदगी और 60 लाख से अधिक ठगी की राशि रिफंड कराई गई है. इसके अलावा सैकड़ों की संख्या में मोबाइल, लैपटॉप, एटीएम कार्ड, पासबुक और सिम कार्ड जब्त किए गए हैं. केस स्टडी 01 15 अक्टूबर 2025 को साइबर थाना को सबसे बड़ी सफलता मिली. पुलिस ने 15 लाख की ठगी के मामले में चार दिन की जांच के बाद 36 सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद ठग को नालंदा से गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने उसके पास से ठगी के 3 लाख 90 हजार 975 रुपए नकद, 39 एटीएम कार्ड, फिंगर स्कैनर, मोबाइल और पासबुक बरामद किया. यह कार्रवाई सुपौल साइबर थाना की तकनीकी दक्षता और त्वरित कार्रवाई क्षमता का प्रतीक बनी. केस स्टडी 02 परसरमा में संचालित सीएसपी संचालक द्वारा मल्हनी गांव की एक महिला के खाते से 2 लाख 89 हजार रुपए की ठगी कर निकासी कर ली गई थी. इसकी शिकायत पीड़िता ने 7 जुलाई को साइबर थाना में की. पुलिस ने 48 घंटे के अंदर 9 जुलाई को पीड़िता को ठगी के 2 लाख 89 हजार रुपए वापस दिला दी. वहीं सीएसपी संचालक के लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई भी की गई. केस स्टडी 03 ट्रैक्टर देने पर 2 लाख 78 हजार रुपए ऑन लाइन ठगी मामले में साइबर थाना पुलिस ने सहरसा जिले के सोनवर्षा राज थाना क्षेत्र के लगमा गांव से एक आरोपी को सितंबर महीने में गिरफ्तार किया. इसके बाद कोर्ट के माध्यम से पीड़ित को करीब डेढ़ लाख रुपए की राशि का भुगतान किया गया. केस स्टडी 04 राजेश्वरी थाना क्षेत्र के भवानीपुर निवासी नीतीश कुमार से 2 लाख 25 हजार की रकम ठगी करने के मामले में साइबर थाना पुलिस ने 2 नवंबर को खुलासा किया. पुलिस ने ठगी की राशि 2 लाख 25 हजार रुपए पीड़ित के खाते में रिफंड कराई. साइबर थानाध्यक्ष सह डीएसपी गौरव गुप्ता ने बताया कि लोग किसी भी अज्ञात कॉल, लिंक या ऑफर पर भरोसा नहीं करें और यदि साइबर ठगी का शिकार हो तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी साइबर थाना में संपर्क करें. कहा कि जिले में साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिए निरंतर अभियान चलाया जा रहा है. लोगों को जागरूक करने और साइबर सुरक्षा के प्रति सजग बनाने के लिए भी कई पहले की जा रही है.

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