Teacher Training in Supaul: सुपौल से राजीव झा की रिपोर्ट. सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और शिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) बसहा में आयोजित पांच दिवसीय सेवाकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हो गया. प्रशिक्षण के समापन पर शिक्षकों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए. इस दौरान शिक्षकों को स्कूलों में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं के समाधान, छात्रों की कम उपस्थिति, कमजोर शिक्षण स्तर और आधुनिक शिक्षण तकनीकों पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया.
“शिक्षक ही बदल सकते हैं स्कूलों की तस्वीर”
प्रमाण-पत्र वितरण समारोह को संबोधित करते हुए संस्थान के प्राचार्य एखलाख खां ने कहा कि विद्यालयों में छात्रों की कम उपस्थिति, कमजोर छात्रों की पहचान और पढ़ाई की धीमी गति जैसी समस्याओं का समाधान शिक्षक अपने स्तर पर कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पढ़ाने का काम नहीं करते, बल्कि वे राष्ट्रनिर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं.
उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे अपने व्यवहार और कार्यशैली से छात्रों के लिए प्रेरणा बनें. शिक्षक जितना सकारात्मक वातावरण बनाएंगे, बच्चों का सीखने का स्तर उतना ही बेहतर होगा.
प्रशिक्षण से शिक्षकों को मिली नई सोच और ऊर्जा
नोडल पदाधिकारी डॉ सुमित कुमार ने कहा कि इस प्रशिक्षण से शिक्षकों को नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच मिली है. प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए और एक-दूसरे से सीखने का अवसर प्राप्त किया. इससे शिक्षण प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी.
प्रशिक्षण प्रभारी मो आफताब आलम, व्याख्याता सुषमा श्रेष्ठा, मनोरंजन कुमार और मदन कुमार ने विभिन्न गतिविधियों और क्रियात्मक अभ्यासों के माध्यम से शिक्षकों को नई शिक्षण तकनीकों की जानकारी दी. कार्यक्रम में छात्रों की सीखने की क्षमता बढ़ाने, कक्षा संचालन को रोचक बनाने और स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया.
नई शिक्षा नीति के तहत हर साल होगा प्रशिक्षण
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि नई शिक्षा नीति के तहत सभी शिक्षकों के लिए प्रत्येक वर्ष पांच दिवसीय सेवाकालीन प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है. इसका उद्देश्य शिक्षकों को समय के अनुसार नई तकनीकों, पाठ्यक्रम में बदलाव और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से जोड़ना है.
शिक्षा विभाग का मानना है कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
