Supaul Power Crisis: सुपौल से आशीष कुमार की रिपोर्ट. सुपौल में हल्की आंधी और बारिश के साथ ही बिजली व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है. शनिवार शाम मौसम बदलते ही जिले के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई. शहर से लेकर गांव तक घुप अंधेरा छा गया और लोग मोबाइल की रोशनी के सहारे रात गुजारने को मजबूर हो गए.
शनिवार शाम करीब 6 बजकर 26 मिनट पर जिले में अचानक मौसम बदला. हल्की हवा और मेघ गर्जन के साथ करीब 15 मिनट तक बारिश हुई. बारिश से लोगों को गर्मी से राहत जरूर मिली, लेकिन बिजली कटते ही परेशानी कई गुना बढ़ गई.
बारिश खत्म, लेकिन बिजली नहीं लौटी
बारिश रुकने के बाद हवा भी शांत हो गई और उमस भरी गर्मी ने लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया. सबसे ज्यादा दिक्कत छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं वाले परिवारों को हुई. कई लोग बच्चों को लेकर घर से बाहर निकल आए, लेकिन हवा नहीं चलने के कारण राहत नहीं मिल सकी.
स्थानीय लोगों का कहना है कि हल्की बारिश में ही बिजली व्यवस्था चरमरा जाना अब आम बात हो गई है. लोगों ने आरोप लगाया कि विभाग हर साल मेंटेनेंस के नाम पर लाखों रुपये खर्च करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम नजर नहीं आता.
मेंटेनेंस पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि पेड़ कटिंग और बिजली पोल की मरम्मत का काम सिर्फ कागजों तक सीमित रहता है. हल्की हवा में भी बिजली के खंभे और ट्रांसफॉर्मर गिर जाते हैं, जिससे घंटों बिजली आपूर्ति बाधित रहती है.
सदर प्रखंड के करिहो गांव निवासी और भाजपा जिला मीडिया प्रभारी सुरेंद्र नारायण पाठक ने कहा कि बिजली विभाग की दो परियोजनाएं चलती हैं, लेकिन दोनों में जवाबदेही की कमी दिखती है. उन्होंने आरोप लगाया कि मेंटेनेंस के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है.
शहर में बिजली लौटी, गांव अब भी परेशान
स्थानीय लोगों के मुताबिक शहर में देर रात तक बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई, लेकिन कई ग्रामीण इलाकों में लंबे समय तक अंधेरा कायम रहा. ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में कई बार 72 घंटे तक बिजली नहीं रहती.
वहीं कार्यपालक अभियंता ई आलोक रंजन ने बताया कि तेज हवा के कारण कई जगहों पर पोल टूट गए थे. शहरी क्षेत्र में दो घंटे बाद बिजली बहाल कर दी गई, जबकि ग्रामीण इलाकों में भी तेजी से मरम्मत कार्य चलाया गया.
