सुपौल में बाल श्रम के खिलाफ अभियान तेज, 22 बच्चे कराए गए मुक्त

Supaul news: बैठक के दौरान श्रम अधीक्षक ने बाल श्रम निषेध अधिनियम 1986 की जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2025-26 में जिले से 14 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया था. वहीं वर्ष 2026-27 में अब तक 8 बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया जा चुका है. इस प्रकार अब तक कुल 22 बाल श्रमिकों को बाल श्रम से बाहर निकाला गया है.

जिलास्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में योजनाओं की समीक्षा. बच्चों को शिक्षा से जोड़ने पर जोर

सुपौल से राजीव झा की रिपोर्ट:

Supaul news: सुपौल समाहरणालय में जिलाधिकारी सावन कुमार की अध्यक्षता में बाल श्रम उन्मूलन को लेकर जिलास्तरीय टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की गई. बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लेकर जिले में चल रहे अभियान और योजनाओं की समीक्षा की.

बैठक के दौरान श्रम अधीक्षक ने बाल श्रम निषेध अधिनियम 1986 की जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2025-26 में जिले से 14 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया था. वहीं वर्ष 2026-27 में अब तक 8 बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया जा चुका है. इस प्रकार अब तक कुल 22 बाल श्रमिकों को बाल श्रम से बाहर निकाला गया है.

उन्होंने बताया कि मुक्त कराए गए 13 बच्चों को तत्काल सहायता के रूप में तीन-तीन हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है. वहीं 5 बाल श्रमिकों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से 25-25 हजार रुपये की राशि फिक्स्ड डिपॉजिट कराने की प्रक्रिया पूरी की गई है. अन्य बच्चों के भुगतान की प्रक्रिया जारी है.

बैठक में बाल श्रम उन्मूलन अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर चर्चा की गई. जिलाधिकारी सावन कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाल श्रम रोकने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाया जाए और स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें शिक्षा से जोड़ा जाए.

बैठक में सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, जिला बाल संरक्षण इकाई के अधिकारी, बाल कल्याण समिति के सदस्य, जीविका के जिला प्रबंधक तथा विभिन्न प्रखंडों के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी मौजूद रहे.

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Published by: Shruti Kumari

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