रोजगार के लिए जॉर्डन गया नौशाद, अब विदेशी जेल में बंद

Supaul news: परिजनों के अनुसार, नौशाद अली 14 दिसंबर को जॉर्डन के लिए रवाना हुआ था और 18 दिसंबर को वहां पहुंचा. अगले दिन कंपनी में उसका इंटरव्यू हुआ. शुरुआत में परिवार से उसकी नियमित बातचीत होती रही, लेकिन मई महीने में अचानक संपर्क टूट गया.

कर्ज लेकर भेजा था विदेश, परिवार पर टूटा आर्थिक संकट

राघोपुर (सुपौल) से आशुतोष झा की रिपोर्ट:

Supaul news: सुपौल जिले के राघोपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत नगर पंचायत सिमराही वार्ड नंबर-5 निवासी नौशाद अली बेहतर रोजगार और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के सपने के साथ जॉर्डन गया था. परिवार को उम्मीद थी कि विदेश में नौकरी मिलने के बाद घर की गरीबी दूर होगी और कर्ज का बोझ कम होगा. लेकिन अब नौशाद के जॉर्डन की जेल में बंद होने की खबर से पूरा परिवार गहरे संकट में है.

परिजनों के अनुसार, नौशाद अली 14 दिसंबर को जॉर्डन के लिए रवाना हुआ था और 18 दिसंबर को वहां पहुंचा. अगले दिन कंपनी में उसका इंटरव्यू हुआ. शुरुआत में परिवार से उसकी नियमित बातचीत होती रही, लेकिन मई महीने में अचानक संपर्क टूट गया.

6 मई के बाद बंद हो गया संपर्क

नौशाद की पत्नी शबाना खातून ने बताया कि 6 मई तक पति से फोन पर बातचीत होती रही. 7 मई को अचानक मोबाइल बंद हो गया. पहले परिवार ने सोचा कि काम में व्यस्त होंगे, लेकिन कई दिनों तक संपर्क नहीं होने पर चिंता बढ़ने लगी.

इसके बाद परिवार ने जॉर्डन में रह रहे गांव के युवक इम्तियाज से जानकारी लेने को कहा. हालांकि कंपनी से भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी.

जेल से आया फोन, बढ़ी चिंता

परिजनों के मुताबिक, 15 मई को अचानक नौशाद का फोन आया. परिवार का कहना है कि उसने जेल से फोन कर बताया कि वह किसी मामले में फंस गया है और जेल में बंद है. इसके बाद से अब तक परिवार का उससे कोई संपर्क नहीं हो पाया है.

कानूनी प्रक्रिया के नाम पर मांगे गये लाखों रुपये

परिवार ने बताया कि 19 मई को एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर नौशाद के बड़े भाई शमशाद से संपर्क किया. उसने कहा कि नौशाद को छुड़ाने के लिए कानूनी प्रक्रिया में करीब पांच लाख रुपये खर्च होंगे.

यह जानकारी मिलने के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया. पहले से आर्थिक तंगी झेल रहे परिवार के सामने अब कानूनी लड़ाई का खर्च भी बड़ी चुनौती बन गया है.

कर्ज लेकर भेजा था विदेश

शबाना खातून ने बताया कि नौशाद को विदेश भेजने के लिए परिवार ने गांव और रिश्तेदारों से कर्ज लिया था. करीब एक लाख रुपये ऊंचे ब्याज पर उधार लिये गये थे, जबकि 55 हजार रुपये का लोन भी लिया गया था.

परिवार को उम्मीद थी कि नौकरी मिलने के बाद धीरे-धीरे कर्ज चुका दिया जाएगा, लेकिन अब घर चलाना भी मुश्किल हो गया है.

बच्चों को पिता के लौटने का इंतजार

नौशाद और शबाना के तीन छोटे बच्चे हैं. परिवार के अनुसार बच्चे रोज अपने पिता के बारे में पूछते हैं. वहीं माता-पिता और परिजन भी नौशाद के सुरक्षित लौटने की उम्मीद लगाये बैठे हैं.

प्रशासन और सरकार से लगायी मदद की गुहार

परिवार ने प्रशासन और सरकार से मदद की अपील की है. परिजनों का कहना है कि उन्हें जॉर्डन के कानून और कानूनी प्रक्रिया की जानकारी नहीं है. ऐसे में सरकार हस्तक्षेप कर नौशाद की स्थिति की सही जानकारी दिलाये और उसे सुरक्षित वापस लाने में मदद करे.

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Published by: Shruti Kumari

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