Supaul News: सुपौल शहर में बिहार लोकल बॉडीज इंप्लाइज फेडरेशन, इकाई सुपौल के बैनर तले कर्मचारियों ने अपनी तीन सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है.
इस हड़ताल का असर केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं है. यदि आंदोलन लंबा खिंचता है तो शहर की सफाई व्यवस्था, कचरा उठाव, कर वसूली, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, जल निकासी और अन्य नगर परिषद सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं. यही वजह है कि यह हड़ताल अब पूरे शहर के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है.
क्यों शुरू हुई सुपौल नगर परिषद कर्मियों की हड़ताल
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सरकार और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता विफल हो गई. इसके बाद उन्हें मजबूर होकर बेमियादी हड़ताल का निर्णय लेना पड़ा. कर्मचारियों का कहना है कि नगर निकायों में वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी, संविदा और अन्य अस्थायी कर्मचारी लगातार सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी सेवा नियमित नहीं की गई.
बिहार स्टेट लोकल बॉडीज इंप्लाइज फेडरेशन के महामंत्री मो. असजद आलम उर्फ अप्पू ने कहा कि कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सेवा का नियमितीकरण बेहद जरूरी है. उनका कहना है कि लंबे समय से काम करने वाले कर्मचारियों को स्थायी सुरक्षा और समान अधिकार मिलने चाहिए.
तीन सूत्री मांगों पर अड़े कर्मचारी
आंदोलन कर रहे कर्मचारियों ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं. पहली मांग नगर निकायों में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी, संविदा और अस्थायी कर्मचारियों की सेवा नियमित करने की है.
दूसरी मांग नगर निकायों में लागू ठेका और आउटसोर्सिंग व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने की है. कर्मचारियों का आरोप है कि इस व्यवस्था के कारण उनका आर्थिक और सामाजिक शोषण हो रहा है तथा समान कार्य के बावजूद उन्हें उचित वेतन और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं.
तीसरी मांग एसीपी-एमएसीपी योजना का प्रभावी क्रियान्वयन और वर्षों से लंबित बकाया राशि का शीघ्र भुगतान करने की है.
शहर में निकला विरोध मार्च, कार्यालय में जड़ा ताला
हड़ताल के पहले दिन कर्मचारियों ने नगर परिषद कार्यालय से विरोध मार्च निकाला. यह मार्च लोहिया नगर चौक, रेलवे स्टेशन चौक, महावीर चौक सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा. इस दौरान कर्मचारियों ने बिहार सरकार और नगर विकास विभाग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की.
विरोध मार्च के बाद सभी कर्मचारी दोबारा नगर परिषद कार्यालय पहुंचे और मुख्य गेट पर ताला लगाकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया. कार्यालय परिसर में आंदोलन जारी है और कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं.
शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ सकता है असर
नगर परिषद की हड़ताल का सबसे बड़ा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ने की आशंका है. यदि कचरा उठाव और सफाई कार्य बाधित होता है तो बाजार, मोहल्लों और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी बढ़ सकती है. इसके अलावा नगर परिषद से जुड़े कई प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकार और कर्मचारियों के बीच जल्द समाधान नहीं निकला तो आम नागरिकों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ सकती है.
Supaul News: सरकार को चेतावनी, आंदोलन होगा और व्यापक
महामंत्री मो. असजद आलम ने स्पष्ट कहा कि जब तक तीनों मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने चेतावनी दी कि आवश्यकता पड़ने पर इस आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.
फिलहाल नगर परिषद सुपौल के कर्मचारी बेमियादी हड़ताल पर हैं और शहर की निगाहें अब सरकार तथा नगर विकास विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं.
