सुपौल आ अन्य कविता सभ का किया गया लोकार्पण

सतीश वर्मा की कविताओं में सुपौल की मिट्टी की जो सौंधी सौंधी खुशबू है वो विरल है

By RAJEEV KUMAR JHA | May 11, 2025 7:01 PM

सुपौल. पब्लिक लाइब्रेरी एंड क्लब में मैथिली के कवि और आलोचक सतीश वर्मा की नयी पुस्तक सुपौल आ अन्य कविता सभ का लोकार्पण किया गया. इस मौके पर मैथिली के प्रसिद्ध साहित्यकार अरविंद ठाकुर ने कहा कि सतीश ने सुपौल कविता संग्रह प्रकाशित कर मातृभूमि के प्रति अपना ऋण उतारा है. वैसे तो मातृभूमि के प्रति ऋण कोई जीवनपर्यंत भी नहीं उतार सकता है, लेकिन कवि सतीश का पहला प्रयास ही सुपौल और सुपौलवासियों के प्रति एक भावात्मक ऋण अदायगी है. सतीश वर्मा की कविताओं में सुपौल की मिट्टी की जो सौंधी सौंधी खुशबू है वो विरल है. जदयू के जिलाध्यक्ष और क्लब के सचिव राजेंद्र यादव ने कहा कि सतीश वर्मा की कविताओं में सुपौल के समरस समाज और समाज को बचाने की एक गजब की बेचैनी है और यह कवि का अपना संघर्ष भी है. कथाकार और कवि शैलेंद्र शैली ने सतीश वर्मा की कविताओं पर टिप्पणी करते कहा कि छद्म राष्ट्रवाद के इस घनघोर काल में सतीश की कविताएं वर्तमान राजनीति की कलई उघाड़ती नजर आती है. सतीश की कविता में नोस्टाल्जिया के साथ-साथ वर्तमान सामाजिक राजनीतिक विद्रुपता को पूरे होशोहवास में शिद्दत के साथ व्यक्त किया गया है. कवि रघुनाथ मुखिया ने जहां सतीश वर्मा की कविताओं को सुपौल शहर का एक गद्यात्मक आख्यान कहा वहीं मुख्तार आलम ने वंचित शोषण समाज का मुखर आवाज. कार्यक्रम के अंतिम सत्र में एक कविता गोष्ठी का भी आयोजन किया गया जिसमें नेपाल से आई कवियित्री प्रियंका पांडे, मैथिली कवि रघुनाथ मुखिया, युवा कवि रविभूषण और अभिलाषा ने अपनी कविताओं से श्रोताओं में देशभक्ति के उत्साह का संचार किया. मंच का संचालन रविभूषण ने किया. लोकार्पण समारोह में जदयू नेता भगवान प्रसाद चौधरी, कांग्रेस नेता विमल यादव, क्लब के अध्यक्ष ब्रजेश सिंह, प्रो. बालकृष्ण लाल दास, आनंदी देवी, गोविंद अग्रवाल, समरेंद्र सिंह, सुब्रत मुखर्जी, शैलेन्द्र प्रताप सिंह, राजद नेता विजय कुमार यादव, एडवोकेट अमर कुमार दास, अनुनय ठाकुर उर्फ राजा बाबू, खुर्शीद आलम, मिलाप चंद्र जैन, संजीव कुमार, संजीव वर्मा, संतोष विपुल, मधु कुमारी, सुभाष वर्मा, पंकज दास, धीरज दास समेत शहर के कई गणमान्य उपस्थित रहे.

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