राघोपुर. नगर पंचायत सिमराही एक बार फिर प्रशासनिक खींचतान के कारण सुर्खियों में है. अधिकारियों के बीच चल रही आपसी तनातनी का सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है. हालात यह हैं कि विकास कार्य ठप पड़े हैं, सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और स्ट्रीट लाइट योजना महीनों से फाइलों में कैद है. प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर कार्यपालक पदाधिकारी वीणा वैशाली और सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी अराधना के बीच समन्वय की भारी कमी है. इस आपसी टकराव का सीधा असर नगर की बुनियादी सुविधाओं पर पड़ रहा है. मुख्य बाजार को छोड़कर अधिकांश वार्डों में नियमित कचरा उठाव बाधित है. कई इलाकों में नालियों की सफाई नहीं हो रही, गलियों में कचरे का अंबार लगा है और बदहाल स्वच्छता व्यवस्था लोगों के लिए गंभीर समस्या बन चुकी है. स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही और अधिकारियों की आपसी खींचतान के कारण पूरा नगर पंचायत गंदगी की चपेट में है. लोगों का कहना है कि जब जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी ही तालमेल नहीं बना पा रहे, तो जनता किससे उम्मीद करे? उल्लेखनीय है कि गत जुलाई 2025 में नगर पंचायत बोर्ड की बैठक में सर्वसम्मति से सभी वार्डों में स्ट्रीट लाइट लगाने का प्रस्ताव पारित किया गया था. इस संबंध में नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा पत्रांक-3208 (दिनांक 20.07.23) एवं पत्रांक-3004 (दिनांक 25.09.24) के माध्यम से आवश्यक निर्देश भी दिए गए. विभागीय निर्देश के आलोक में चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया, जिसमें सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी, नगर पंचायत के जेई, विद्युत विभाग के जेई तथा संबंधित वार्ड पार्षद को शामिल किया गया. नगर कार्यपालक पदाधिकारी वीणा वैशाली द्वारा पत्रांक-71 (दिनांक 16.01.26) के माध्यम से समिति को सभी विद्युत पोलों की गणना कर रिपोर्ट कार्यालय में जमा करने का निर्देश दिया गया था, ताकि टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा सके. पोलों की वार्डवार नंबरिंग भी पहले ही कराई जा चुकी थी और 25 जनवरी तक रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया था. लेकिन एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी. वार्ड पार्षदों का कहना है कि उन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में पोलों की गणना कर सूची कार्यालय को सौंप दी है, जिसमें स्ट्रीट लाइट की आवश्यकता वाले स्थानों का स्पष्ट उल्लेख है. बावजूद इसके न तो सूची पर कोई निर्णय लिया गया और न ही टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ पाई. नतीजतन कई वार्ड आज भी अंधेरे में डूबे हुए हैं. जब इस विषय पर सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी अराधना से सवाल किया गया, तो उन्होंने यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि उन्हें स्ट्रीट लाइट की खरीद प्रक्रिया से बाहर रखा गया है, इसलिए वे कोई कार्रवाई नहीं कर सकतीं. उनके इस रवैये को योजना में अनावश्यक विलंब और जिम्मेदारी से बचने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. पूरे मामले पर जब एसडीएम नीरज कुमार से प्रतिक्रिया ली गई, तो उन्होंने कहा कि मामला फिलहाल उनके संज्ञान में नहीं है, हालांकि शीघ्र जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया. फिलहाल नगर पंचायत सिमराही की जनता सफाई और रोशनी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए इंतजार करने को मजबूर है.
प्रशासनिक खींचतान की भेंट चढ़ा सिमराही नपं, गंदगी और अंधेरे में जीने को मजबूर जनता
अधिकारियों के बीच चल रही आपसी तनातनी का सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है
