बारिश से धान व मक्का के पैदावार पर हो सकता है असर

जिले में पिछले दो दिनों से रूक-रूक कर हो रही बारिश से किसानों की बढ़ी चिंता

– जिले में पिछले दो दिनों से रूक-रूक कर हो रही बारिश से किसानों की बढ़ी चिंता – खेतों में जल जमाव से सड़ रही है टमाटर, गोभी व बैंगन की फसलें – धूप नहीं निकली तो किसानों को उठाना पड़ सकता है नुकसान – पिछले 48 घंटों में जिले में 59.01 मिलीमीटर दर्ज की गई बारिश सुपौल जिले में पिछले दो दिनों से रूक-रूक कर हो रही बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. धान और मक्का अब कटाई के अंतिम चरण में है. लगातार हो रही बरसात से खेतों में पानी भरने लगा है. इससे फसलों के खराब होने और पैदावार पर विपरीत असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है. किसानों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से मौसम का मिजाज अचानक बदल गया है. दिन भर बादल छाए रहते हैं. बीच-बीच में हल्की से मध्यम बारिश हो रही है. कई जगहों पर कटी फसल सड़ने लगी है, जिससे नुकसान की संभावना बढ़ गई है. किसानों ने बताया कि धान की कटाई का समय है, लेकिन लगातार बारिश से फसल की बालियां भींगकर काली पड़ने लगी है. अगर धूप नहीं निकली तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. बारिश ने केवल धान ही नहीं बल्कि मक्का और सब्जी की खेती पर भी असर डाला है. सब्जी फसल पैदा करनेवाले किसानों का कहना है कि टमाटर, गोभी, बैंगन जैसी फसलें सड़ने लगी हैं. खेतों में जलजमाव से पौधों की जड़ गल रही है, जिससे उत्पादन घटने का डर है. उधर, रूक-रूक कर हो रही बारिश से शहर के कई सड़कें कीचड़मय हो गई है. इससे लोगों को पैदल चलने में भी परेशानी हो रही है. कृषि मौसम वैज्ञानिक की चेतावनी क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ देवन कुमार चौधरी ने बताया कि पिछले 48 घंटों में जिले में 59.01 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है. बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के कारण उत्तर बिहार के कई जिलों में अगले दो दिनों तक बादल छाए रहने और हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है. उन्होंने कहा इस समय धान की कटाई और मक्का की भंडारण प्रक्रिया चल रही है. ऐसे में किसानों को चाहिए कि वे अपनी कटी हुई फसल को खुले में नहीं रखें. यदि संभव हो तो तिरपाल या प्लास्टिक शीट का उपयोग करें. खेतों में जलनिकासी की व्यवस्था करना भी जरूरी है, ताकि पानी फसलों की जड़ों में नहीं ठहरे. सरकार से राहत की उम्मीद किसानों ने जिला प्रशासन से भी मदद की गुहार लगाई है. उनका कहना है कि अगर आने वाले दिनों में मौसम सुधरा नहीं तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा. कई किसानों ने कृषि विभाग से फसल क्षति सर्वे कराने और बीमा क्लेम की प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग की है. उधर, जिला कृषि पदाधिकारी ने पप्पू कुमार ने बताया कि मोंथा चक्रवात की वजह से हुई बारिश से धान की फसल को नुकसान हो सकता है. हालांकि फसल क्षति के आकलन को लेकर अब तक विभाग की ओर से निर्देश नहीं मिला है. विभागीय निर्देश मिलने पर फसल क्षति का आकलन कर मुआवजा की राशि के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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