अस्पताल में पूछताछ सहायता केंद्र नहीं होने से भटकते रहते हैं मरीज

हर दिन 250 से 300 मरीज इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं रेफरल अस्पताल

– राघोपुर रेफरल अस्पताल में मरीज व उनके परिजनों को होती है परेशानी – हर दिन 250 से 300 मरीज इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं रेफरल अस्पताल – स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मरीज भटकते रहते हैं एक भवन से दूसरे भवन राघोपुर. रेफरल अस्पताल में पूछताछ सहायता केंद्र नहीं होने के कारण मरीज और उनके परिजनों को परेशानी होती है. प्रखंड के इस एकमात्र बड़े सरकारी अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन स्पष्ट दिशा-निर्देश और मार्गदर्शन के अभाव में उन्हें इधर-उधर भटकना पड़ता है. अस्पताल प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन 250 से 300 मरीज ओपीडी में पंजीकरण कराते हैं, जबकि 25 से 30 मरीज आपातकालीन विभाग में इलाज के लिए आते हैं. इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के आने के बावजूद अस्पताल परिसर में किसी भी प्रकार का सूचना या पूछताछ केंद्र नहीं होने से मरीजों के लिए परेशानी बनी रहती है. मुख्य द्वार के पास केवल रजिस्ट्रेशन काउंटर स्थित है, जबकि बीपी, वजन जांच केंद्र, डॉक्टरों के चैंबर, दवा वितरण काउंटर, पैथोलॉजी, एक्स-रे, ईसीजी, महिला एवं पुरुष वार्ड और डिलीवरी वार्ड अलग-अलग भवनों में फैले हुए हैं. इससे पहली बार आने वाले मरीजों को यह समझना मुश्किल हो जाता है कि उन्हें कहां जाना चाहिए. ग्रामीण इलाकों से आने वाले बुजुर्ग, गरीब और अशिक्षित मरीजों को सबसे अधिक परेशानी होती है. उन्हें ना तो यह जानकारी मिल पाती है कि कौन सी सेवा किस भवन में उपलब्ध है और ना ही कोई कर्मचारी उन्हें उचित दिशा दिखाने के लिए मौजूद होता है. इसके कारण मरीजों को इलाज से पहले ही घंटों तक भटकना पड़ता है. मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अस्पताल में दिशा-निर्देश देने वाला कोई स्थायी कर्मचारी या बोर्ड नहीं है. नतीजतन लोग अपनी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक भवन से दूसरे भवन तक भटकते रहते हैं. इस अव्यवस्था के चलते अस्पताल की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. उधर, अस्पताल प्रबंधक नोमान अहमद ने बताया कि पहले अस्पताल परिसर में एक सहायता केंद्र था, लेकिन उसकी स्थिति उचित स्थान पर नहीं थी. इसके कारण लोगों को सुविधा नहीं मिल पा रही थी और धीरे-धीरे वह निष्क्रिय हो गया. अब उसे मुख्य द्वार के समीप उचित स्थान पर पुनः स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि मरीजों को आवश्यक जानकारी समय पर मिल सके. नए पूछताछ सहायता केंद्र में एक प्रशिक्षित कर्मचारी की नियुक्ति की जाएगी जो मरीजों को सभी आवश्यक जानकारियां उपलब्ध कराएगा. साथ ही परिसर में साइन बोर्ड भी लगाए जाएंगे, जिससे मरीज और उनके परिजनों को किसी प्रकार की कठिनाई नहीं हो.

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