मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे संचालक, विभाग बना है उदासीन

अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम व अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर नहीं कसी जा रही नकेल

– शहर से लेकर ग्रामीण इलाके में संचालित है अवैध नर्सिंग होम, पैथोलॉजी व अल्ट्रासाउंड सेंटरअवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम व अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर नहीं कसी जा रही नकेल – अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम व अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर नहीं कसी जा रही नकेल – पैरामेडिकल या तकनीकी प्रशिक्षण बिना प्राप्त किए मरीजों को लिख रहे हैं दवा – पूरे जिले में 50 नर्सिंग होम व क्लिनिक विधिवत रूप से हैं पंजीकृत सुपौल. जिले में अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम, क्लिनिक, पैथोलॉजी सेंटर और अल्ट्रासाउंड संस्थानों पर नकेल कसने को लेकर स्वास्थ्य विभाग दावा तो करता है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. विभाग का अधिकारिक रिकॉर्ड बताता है कि पूरे जिले में केवल 50 निजी स्वास्थ्य केंद्र (नर्सिंग होम, हॉस्पिटल, क्लिनिक) ही विधिवत रूप से पंजीकृत हैं. इसी तरह सिर्फ 44 पैथोलॉजी और 34 अल्ट्रासाउंड संस्थान ही स्वास्थ्य विभाग से मान्यता प्राप्त हैं. जिले में पंजीकृत संस्थानों की तुलना में अवैध संस्थान कई गुणा अधिक हैं. शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक कई जगह छोटे कमरों, किराये की दुकान और आवासीय भवन में ही क्लिनिक, पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित किए जा रहे हैं. इनमें से ना तो कोई लाइसेंस लेते हैं और ना ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी मानकों को पूरा कर रहे है. कुछ संस्थान ऐसे लोगों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं जो पैरामेडिकल या तकनीकी प्रशिक्षण तक नहीं रखते. फिर भी वे मरीजों को दवा लिखने से लेकर जांच रिपोर्ट जारी करने तक का काम कर रहे हैं. इससे चिकित्सा सेवा की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. कई संस्थानों पर ताला, पर फिर भी रफ्तार धीमी पिछले एक साल में जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने दर्जनों संस्थानों पर छापेमारी की है. कई पैथोलॉजी सेंटर बिना लाइसेंस के पाए गए और उन्हें बंद करने का आदेश दिया गया. एक अल्ट्रासाउंड केंद्र को बिना रेडियोलॉजिस्ट चलाने के आरोप में सील किया गया. वहीं तीन अल्ट्रासाउंड सेंटर का अन्य कारणों से लाइसेंस अवधि में विस्तार नहीं किया गया. तीन क्लिनिक और नर्सिंग होम के खिलाफ भी कार्रवाई की गई, लेकिन यह कार्रवाई अक्सर अस्थायी साबित होती है, क्योंकि कुछ संस्थान कुछ दिनों बाद फिर से खुल जाते हैं. जानकार बताते है कि सरकार को दोहरा कदम उठाने की जरूरत है. कहा कि जागरूकता बढ़ाई जाए, ताकि लोग समझें कि अवैध संस्थानों में इलाज करवाना कितना खतरनाक है. लगातार कड़ी कार्रवाई हो, ताकि ऐसे संस्थानों पर डर बने. कहते हैं सीएस सीएस डॉ ललन कुमार ठाकुर ने कहा कि 40 बेड तक के नर्सिंग होम, हॉस्पिटल, क्लिनिक संचालित करने के लिए लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं है. कहा कि पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाया गया है, ताकि योग्य संस्थानों को लाइसेंस लेने में परेशानी नहीं हो. निजी संस्थान में योग्य चिकित्सक, प्रशिक्षित तकनीशियन, मानक उपकरण, भवन सुरक्षा प्रमाणन, बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन, प्रदूषण बोर्ड की अनुमति, इन सभी मानकों का पालन करना आवश्यक है. जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार अभियान चलाया जा रहा हैं. जो इन सभी मानकों का पालन का पालन नहीं कर रहा हे. उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है.

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