अब सड़ने लगी है धान, मक्का व सब्जी की फसलें

किसानों को सता रही है मेहनत व पूंजी डूबने की चिंता

– पिछले चार दिनों से हजारों एकड़ खेतों में जमा है बाढ़ का पानी – किसानों को सता रही है मेहनत व पूंजी डूबने की चिंता निर्मली. बाढ़ की मार से किसानों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही है. कोसी नदी और उसकी सहायक धाराओं के पानी के फैलाव से अनुमंडल क्षेत्र के कई इलाकों में हजारों एकड़ खेतों में लगी धान, मक्का और सब्जी की फसलें पिछले तीन-चार दिनों से जलमग्न है. लगातार पानी में डूबे रहने के कारण फसलें अब सड़ने लगी हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान का अंदेशा है. मरौना प्रखंड के गनौरा पंचायत की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई जा रही है. यहां लगभग 90 प्रतिशत खेतों में पानी भरा हुआ है. खेतों में खड़ी धान की बालियां पूरी तरह डूब चुकी हैं, जिससे उत्पादन पर गंभीर असर पड़ेगा. किसान अब असमंजस की स्थिति में हैं कि आगे खेती की भरपाई कैसे की जाए. गनौरा पंचायत के मुखिया जितेंद्र कुमार ने किसानों की इस कठिनाई को लेकर जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने डीएम सावन कुमार को एक पत्र ई-मेल के माध्यम से भेजा है, जिसमें किसान हित में त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है. मुखिया ने पत्र में उल्लेख किया है कि पिछले तीन-चार दिनों से पानी उतरने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे किसानों की मेहनत और पूंजी दोनों डूब गई है. उन्होंने फसल क्षति का आकलन कर उचित मुआवजा देने की भी मांग की है. मुखिया ने कहा कि पंचायत के कई गांवों में ना तो निकासी की समुचित व्यवस्था है और ना ही राहत कार्यों की कोई ठोस पहल दिख रही है. उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि जल्द सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को राहत दी जाए, ताकि वे दोबारा खेती के लिए तैयार हो सकें. उधर, किसानों ने भी प्रशासन से फसल क्षति का मुआवजा, खाद-बीज सहायता और सिंचाई सुविधा बहाल करने की मांग की है. जिले के अन्य प्रखंडों में भी इसी तरह की स्थिति बताई जा रही है. किसान वर्ग अब जिला प्रशासन की पहल की प्रतीक्षा में है.

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