बिहार की सबसे भ्रष्ट सरकार नीतीश सरकार : शाहनवाज आलम

कांग्रेस नेता सह पूर्व प्रत्याशी मिन्नत रहमानी ने कहा कि सुपौल जिला का पलायन दर राज्य में सबसे अधिक है

सुपौल. कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव व बिहार के सह प्रभारी शाहनवाज आलम ने बुधवार को कांग्रेस नेता मिन्नत रहमानी द्वारा संचालित सामाजिक न्याय संवाद अभियान के अंतर्गत चैनसिंहपट्टी फुटबॉल ग्राउंड में आयोजित जन संवाद कार्यक्रम के दौरान नीतीश सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने नीतीश कुमार की अगुवाई वाली राज्य सरकार को बिहार के इतिहास की सबसे भ्रष्ट सरकार करार दिया. कहा कि केंद्र सरकार से मिले बजट का उपयोग न तो राज्य के विकास कार्यों में किया गया और न ही वह राशि केंद्र को वापस लौटाई गई. श्री आलम ने नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि नीतीश सरकार 71 हजार करोड़ रुपये का हिसाब देने में विफल रही है. उन्होंने कहा कि जिस मद में पैसे लिए गए, उसी मद में उनके खर्च का कोई साक्ष्य सरकार नहीं दे पाई है. कैग की रिपोर्ट साफ इशारा करती है कि यह पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है. उन्होंने यह भी कहा कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में राज्य को आवंटित 3.26 लाख करोड़ रुपये में से केवल 2.60 लाख करोड़ रुपये ही खर्च किए गए, जिससे यह साफ होता है कि सरकार काम करने में विफल रही है. श्री आलम ने नीतीश कुमार से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की मांग की. कार्यक्रम में दलित समुदाय से संवाद करते हुए शाहनवाज आलम ने वादा किया कि महागठबंधन की सरकार बनने पर माई-बहिन-मान योजना के तहत हर महिला को 2500 रुपये की सहायता राशि दी जाएगी. कांग्रेस नेता सह पूर्व प्रत्याशी मिन्नत रहमानी ने कहा कि सुपौल जिला का पलायन दर राज्य में सबसे अधिक है. उन्होंने कहा कि बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से जूझ रहे सुपौल में यदि सरकार और मंत्रियों की इच्छा शक्ति होती तो यहां उद्योग-धंधे लगाकर रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते थे. उन्होंने दावा किया कि बिहार में बदलाव की शुरुआत सुपौल विधानसभा से होगी. कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष सूर्यनारायण मेहता ने की. श्री मेहता ने कहा कि इस बार सुपौल ज़िले की सभी पांचों विधानसभा सीटें महागठबंधन के पक्ष में जाएगी. मौके पर राकेश मिश्रा, नंदकिशोर राम, संजय पासवान, अशोक राम, चंदेश्वरी सदा, सैनी सदा, रविंद्र राम, प्रवेश राम, विमल यादव, जितेंद्र झा, पीतांबर पाठक, अनोखा सिंह, पिंकी देवी, मुलिया देवी, राजकुमारी, लखेंन देवी, सुशीला देवी, रहमत अली, मो. नोमान, सोनू आजाद, प्रमोद यादव, मो. सलाउद्दीन समेत कई स्थानीय नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे.

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