निजी अस्पतालों व क्लिनिकों के लिए नया नियम लागू, अनिवार्य होगा पंजीकरण : सीएस

पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी

सुपौल.

सिविल सर्जन डॉ बाबू साहब झा ने बुधवार को सिविल सर्जन कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में बिहार सरकार द्वारा जारी बिहार लघु एवं मध्यम स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठान (स्थापना एवं पंजीकरण) विनियम, 2026 की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने निजी स्वास्थ्य संस्थानों की कार्य प्रणाली को व्यवस्थित एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से यह नया विनियम लागू किया है.

बिना पंजीकरण नहीं चल सकते स्वास्थ्य सेवा संस्थान

सिविल सर्जन ने बताया कि इस विनियम के तहत जिले के सभी 1 से 40 बेड तक की क्षमता वाले अस्पताल, नर्सिंग होम, मैटरनिटी होम, क्लीनिक, डिस्पेंसरी, दंत चिकित्सा केंद्र, पैथोलॉजी लैब एवं अन्य स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठानों का पंजीकरण अनिवार्य होगा. बिना पंजीकरण के किसी भी स्वास्थ्य सेवा संस्थान का संचालन नहीं किया जा सकेगा. उन्होंने बताया कि पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी. औपबंधिक (अस्थायी) पंजीकरण के लिए 500 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है. यह पंजीकरण एक वर्ष के लिए मान्य होगा तथा अधिकतम दो बार नवीनीकृत किया जा सकेगा. तीन वर्षों के भीतर संबंधित संस्थान को स्थायी पंजीकरण प्राप्त करना अनिवार्य होगा.

नए विनियम के अनुसार प्रत्येक स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठान में कार्य अवधि के दौरान संबंधित चिकित्सा पद्धति का कम-से-कम एक योग्य एवं पंजीकृत हेल्थकेयर प्रैक्टिशनर उपलब्ध रहना आवश्यक होगा. साथ ही उसके नाम और योग्यता का स्पष्ट प्रदर्शन भी करना होगा ताकि मरीजों और उनके परिजनों को जानकारी मिल सके.

डॉ झा ने बताया कि प्रत्येक जिले में जिला पंजीकरण प्राधिकार का गठन किया जाएगा. जिसकी अध्यक्षता संबंधित सिविल सर्जन करेंगे. यह प्राधिकार स्वास्थ्य संस्थानों के पंजीकरण, निरीक्षण, नवीनीकरण एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए जिम्मेदार होगा. राज्य स्तर पर भी एक परिषद का गठन किया जाएगा, जो अपीलों की सुनवाई और निगरानी का कार्य करेगी.

उन्होंने कहा कि बिना पंजीकरण स्वास्थ्य सेवा संस्थान चलाने पर पहली बार 10 हजार रुपये, दूसरी बार 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. बार-बार उल्लंघन करने पर संस्थान को सील करने के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है. इसके अलावा गलत सूचना देने, निरीक्षण में बाधा डालने या नियमों का उल्लंघन करने पर पांच लाख रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकता है. सिविल सर्जन ने जिले के सभी निजी अस्पताल संचालकों, क्लिनिक मालिकों एवं स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं से अपील की कि वे निर्धारित प्रावधानों का पालन करते हुए समय पर अपना पंजीकरण सुनिश्चित करें. ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता एवं मरीजों की सुरक्षा को और बेहतर बनाया जा सके. इस मौके पर डॉ शांतिभूषण, डॉ विनोद वर्मा आदि मौजूद थे.

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