सुपौल. जिला बाल संरक्षण इकाई एवं एक संस्था के संयुक्त तत्वावधान में बहुउदेशीय सभाकक्ष में बाल संरक्षण तंत्र के सुदृढ़ीकरण-बाल संरक्षण समितियों के सशक्तिकरण व बाल हितैषी पंचायत बनाने के लिए विविध हितधारकों के साथ एक दिवसीय समन्वय बैठक कवच परियोजना के अंतर्गत आयोजित की गयी. इसमें सहरसा, मधेपुरा, अररिया एवं सुपौल जिला के जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशकों एवं बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष व सदस्यों ने भाग लिया. कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए दिवेश कुमार शर्मा ने कहा कि प्रासंगिक बाल अधिकार से संबंधित मुद्दों तथा इनके समुचित समाधान के लिए सरकारी व्यवस्थाएं, प्रावधानों एवं बाल अधिकार संरक्षण में सरकारी हितधारकों के साथ-साथ गैर सरकारी संगठनों की भूमिका बहुत आवश्यक है. कोशी क्षेत्र के जिलों में विभिन्न भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक कारणों से बाल विवाह का स्तर ऊंचा है. लेकिन आशा है कि कवच परियोजना के अंतर्गत हमें बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायतों के साथ ही बाल हितैषी ग्राम पंचायतों की दिशा में आगे बढ़ने में सहयोग मिलेगा. इस मौके पर भगवानजी पाठक द्वारा कार्यक्रम का संचालन करते हुए सुपौल में कवच परियोजना के औपचारिक आरंभ की घोषणा की. इस मौके पर श्रम अधीक्षक सुशील कुमार यादव ने बताया कि बाल हित से संबंधित सभी विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की आवश्यकता है. इस अवसर पर जिला बाल संरक्षण इकाई अध्यक्ष ईश्वर चन्द्र मिश्रा, पंचम सिंह, सिद्धार्थ कुमार, चांदनी कुमारी, लील मुर्मू, रामनरेश कौशिक, भास्कर कश्यप, अफसारी इल्ताफ़, कौशलेन्द्र कुमार सहित विभिन्न संगठनों के सामाजिक कार्यकर्ता एवं किशोर न्याय परिषद् के सदस्यों ने भाग लिया.
बाल हितैषी पंचायत बनाने को लेकर हुई बैठक
बाल हित से संबंधित सभी विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की आवश्यकता है
