भूमि विवाद को ले मानसरोवर झील निर्माण अधर में
अंचलाधिकारी के पास पहुंचा मामला
वीरपुर. बहुप्रतीक्षित मानसरोवर झील परियोजना के निर्माण कार्य को लेकर एक बार फिर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं. करीब 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने के बाद जब उम्मीद जगी थी कि वर्ष के अंत तक झील आम पर्यटकों के लिए खोल दी जाएगी, तभी भूमि विवाद के कारण परियोजना एक बार फिर विवादों में घिर गई है. इस बार झील निर्माण स्थल की 12 एकड़ भूमि, जो पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अधीन है, में से 02 एकड़ जमीन पर मत्स्य विभाग ने मालिकाना हक जताया है. जिला मत्स्य पदाधिकारी सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी ने 03 मई 2025 को पत्रांक 313 के माध्यम से दावा किया है कि खाता संख्या 658, खेसरा 692, रकवा 02 एकड़ भूमि मत्स्य विभाग के बीज प्रक्षेत्र के अंतर्गत आती है. वहीं दूसरी ओर वन क्षेत्र पदाधिकारी अजय कुमार ठाकुर का कहना है कि पूरी 12 एकड़ भूमि की जमाबंदी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के नाम पर दर्ज है और विभाग 2025-26 तक नियमित रूप से लगान भी अदा कर रहा है. अंचलाधिकारी के पास पहुंचा मामला वन विभाग द्वारा 16 मई 2025 को सीओ बसंतपुर को पत्र लिखकर भूमि की पुनः जांच और स्पष्ट सीमांकन कराने की मांग की गई है, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके और निर्माण कार्य में कोई और अड़चन न आए. यह परियोजना बीते एक साल से वित्तीय अभाव के कारण रुकी हुई थी, लेकिन हाल ही में जब आवश्यक राशि उपलब्ध कराई गई, तो लोगों को उम्मीद जगी थी कि झील जल्द ही पर्यटकों के लिए खोल दी जाएगी. पर अब यह नया विवाद कार्य में फिर से देरी की आशंका पैदा कर रहा है. मानसरोवर झील को पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय रोजगार, मत्स्य पालन और जैव विविधता संरक्षण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. ऐसे में विभागीय समन्वय की कमी से विकास के इस महत्वपूर्ण प्रयास को नुकसान पहुंचने की आशंका है.
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