– बरकतों, रहमतों और इबादत का मुकद्दसस माह है रमजान सुपौल. बरकत, रहमत और मगफिरत का मुकद्दस महीना रमजान शुरू हो गया है. महिलाएं जहां सेहरी और इफ्तार की तैयारियों में व्यस्त हैं, वहीं पुरुष जरूरी सामानों की खरीदारी कर रहे हैं. रमजान को लेकर बाजारों में फलों की दुकानें सज चुकी है. खजूर, सेब, अंगूर, अनार और सेवई से बाजार गुलजार है, लेकिन इस साल महंगाई ने रोजेदारों की परेशानी बढ़ा दी है. फल और खजूर के दामों में 20 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. रमजान के महीने में मुस्लिम समुदाय सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा रखते हैं. रोजा शुरू करने से पहले सेहरी और शाम को इफ्तार किया जाता है. पूरे महीने के 30 रोजों को तीन अशरों में बांटा गया है. पहले 10 दिन रहमत, दूसरे 10 दिन बरकत और आखिरी 10 दिन मगफिरत कहलाते हैं. महंगाई से परेशान लोग बाजार में इस साल केला 40-60 रुपये दर्जन, सेब 160-200 रुपये किलो, अंगूर 160-200 रुपये किलो, अनार 160-260 रुपये किलो, खीरा 60 रुपये किलो, पपीता 60 रुपये किलो, अमरूद 150 से 160 रुपये प्रति किलो और खजूर 250-600 रुपये प्रति पैकेट बिक रहा है. बढ़ती कीमतों के बीच लोग सादगी से रमजान मनाने की बात कह रहे हैं. खजूर और पानी से इफ्तार की सुन्नत स्थानीय रोजेदारों का कहना है कि खजूर और पानी से रोजा खोलना सुन्नत है. व्यापारियों से अपील की कि रमजान जैसे मुकद्दस महीने में दामों को मुनासिब रखें, ताकि गरीब और मध्यम वर्ग पर आर्थिक बोझ न पड़े. इस महीने में नमाज के साथ रोजा रखना फर्ज है, साथ ही गरीबों की मदद, भूखों को खाना खिलाना और जरूरतमंदों को कपड़े देना बड़ा सवाब माना गया है. दुआ और इबादत का खास महीना इस्लाम धर्म में रमजान को बेहद पाक माना जाता है. मुस्लिम धर्मावलंबी पूरे महीने रोजा रखते हैं, पांच वक्त की नमाज अदा करते हैं, ज़कात देते हैं और अल्लाह की इबादत में समय बिताते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रमजान में सच्चे दिल से मांगी गई दुआएं कुबूल होती हैं. इबादत का दोगुना सवाब मिलता है. रमजान के पाक महीने में कुरान शरीफ की तिलावत की खास अहमियत है. मान्यता है कि इसी महीने पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब पर कुरान शरीफ नाजिल हुआ था, इसलिए रोजेदार इस दौरान ज्यादा से ज्यादा कुरान पढ़ते हैं.
रमजान की दस्तक से सुपौल में इबादत का माहौल, महंगाई ने बढ़ाई रोजेदारों की चिंता
खजूर और पानी से इफ्तार की सुन्नत
