बिना पंजीकरण चल रहे अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर स्वास्थ्य विभाग का शिकंजा, 9 संस्थानों को जारी हुआ नोटिस

Illegal Ultrasound Center: सुपौल में बिना वैध पंजीकरण संचालित हो रहे अल्ट्रासाउंड केंद्र अब स्वास्थ्य विभाग के निशाने पर हैं. जांच में अनियमितताएं मिलने के बाद नौ केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी.

सुपौल रौशन सिंह की रिपोर्ट

Illegal Ultrasound Center: सुपौल जिले में बिना वैध पंजीकरण के संचालित अल्ट्रासाउंड केंद्रों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है. जिला पदाधिकारी के निर्देश पर गठित जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर सिविल सर्जन ने नौ अल्ट्रासाउंड केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. संबंधित संस्थानों से पंजीकरण, नवीकरण और अन्य आवश्यक दस्तावेज निर्धारित समय के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है.

जांच रिपोर्ट के बाद शुरू हुई कार्रवाई

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एमबीबीएस चिकित्सकों के सहयोग से गठित विशेष जांच टीम ने जिले के विभिन्न अल्ट्रासाउंड केंद्रों का निरीक्षण किया था. जांच के दौरान कई संस्थानों में पंजीकरण संबंधी अनियमितताएं और नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए. इसके बाद विभाग ने संबंधित संचालकों के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है.

छह बिंदुओं पर मांगा गया जवाब

सिविल सर्जन द्वारा जारी नोटिस में सभी संबंधित केंद्रों से छह महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है. इनमें अल्ट्रासाउंड केंद्र के पंजीकरण से संबंधित आवेदन, पंजीकरण के नवीकरण का आवेदन, स्थान परिवर्तन की अनुमति तथा अन्य वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति स्थान परिवर्तन करने वाले संस्थानों पर भी कार्रवाई की जाएगी.

इन संस्थानों को मिला नोटिस

नोटिस पाने वाले संस्थानों में ग्लोबल अल्ट्रासाउंड डायग्नोस्टिक सेंटर, पी.एन. मेमोरियल अल्ट्रासाउंड क्लीनिक, प्रीत अल्ट्रासाउंड सेंटर, शंकर अल्ट्रासाउंड, राजा डायग्नोस्टिक, सनशाइन अल्ट्रासाउंड सेंटर, सूर्या डायग्नोस्टिक यूनिट, आराध्या अल्ट्रासाउंड सेंटर तथा लक्ष्मी अल्ट्रासाउंड सेंटर शामिल हैं.

नियमों का उल्लंघन करने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई

Illegal Ultrasound Center: सिविल सर्जन ने कहा कि जिले में बिना पंजीकरण या नियमों का उल्लंघन कर संचालित किसी भी अल्ट्रासाउंड केंद्र को बख्शा नहीं जाएगा. सभी संस्थानों को पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम के प्रावधानों का सख्ती से पालन करना होगा. निर्धारित समय पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने अथवा अनियमितता पाए जाने पर संबंधित संस्थानों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

पारदर्शिता और भ्रूण लिंग जांच पर रोक की दिशा में कदम

Illegal Ultrasound Center: स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई को जिले में अल्ट्रासाउंड केंद्रों के संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भ्रूण लिंग जांच जैसी अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है. विभाग ने कहा कि आगे भी ऐसे केंद्रों की नियमित जांच जारी रहेगी ताकि स्वास्थ्य सेवाएं नियमों के अनुरूप संचालित हों.

क्या कहता है पीसी-पीएनडीटी कानून?

अल्ट्रासाउंड केंद्रों का संचालन पीसी-पीएनडीटी (Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques) Act, 1994 के तहत होता है.इस कानून के अनुसार बिना वैध पंजीकरण (Registration) के कोई भी अल्ट्रासाउंड या इमेजिंग सेंटर संचालित नहीं किया जा सकता. पंजीकरण के बिना केंद्र चलाना कानून का उल्लंघन है. केंद्र का स्थान बदलने, मशीन स्थानांतरि त करने या संचालन में बदलाव के लिए भी सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है.प्रत्येक केंद्र को पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदर्शित करना, निर्धारित रिकॉर्ड सुरक्षित रखना तथा यह सूचना लगाना अनिवार्य है कि भ्रूण के लिंग की जांच और जानकारी देना कानूनन प्रतिबंधित है.

सजा का क्या है प्रावधान?

पीसी-पीएनडीटी अधिनियम के तहत बिना पंजीकरण केंद्र चलाना, भ्रूण का लिंग बताना या इससे जुड़े नियमों का उल्लंघन दंडनीय अपराध है.गंभीर उल्लंघन पर पहली बार तीन वर्ष तक की जेल और 50 हजार रुपये तक जुर्माना हो सकता है.दोबारा अपराध करने पर पांच वर्ष तक की जेल और एक लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही केंद्र का पंजीकरण निलंबित या रद्द किया जा सकता है.

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By Pintu Pranav

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