election News सुपौल जिले में विधानसभा चुनाव के द्वितीय चरण की तैयारी जोर-शोर से चल रही है. 11 नवंबर को होने वाले मतदान को लेकर जिले के पांच विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है. जैसे-जैसे तारीख नजदीक आ रही है, राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और उम्मीदवारों के समर्थक गांव-गांव जाकर प्रचार में जुट गए हैं. सुपौल, त्रिवेणीगंज, निर्मली, छातापुर और पिपरा विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी हलचल चरम पर है. ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी मोहल्लों तक में हर तरफ सिर्फ चुनाव की ही चर्चा है. चाय की दुकानों, चौपालों और नुक्कड़ों पर लोग उम्मीदवारों की ताकत और कमजोरी पर खुलकर बहस कर रहे हैं. कई जगहों पर लोग पुराने विकास कार्यों का हिसाब मांग रहे हैं, तो कहीं जातीय समीकरण और पार्टी की लहर पर जीत-हार के अनुमान लगाए जा रहे हैं. चाय की दुकानों पर बैठकी अब राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गई हैं. यहां हर कोई राजनीतिक विश्लेषक बन गया है कोई मौजूदा विधायक की उपलब्धियों का बखान कर रहा है, तो कोई बदलाव की मांग उठा रहा है. वहीं, युवाओं के बीच सोशल मीडिया पर भी चुनावी चर्चा जोरों पर है. फेसबुक, व्हाट्सएप और एक्स (ट्विटर) पर हर दल के कार्यकर्ता अपने-अपने नेता और पार्टी के प्रचार में जुटे हैं. सुपौल में चुनावी तापमान में तेजी आने के साथ ही उम्मीदवारों की रैलियों और जनसभाओं का सिलसिला भी बढ़ गया है. सड़कों पर बैनर-पोस्टर और गली-मोहल्लों में लाउडस्पीकर की गूंज से माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में रंग गया है. सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन भी सतर्क है और शांतिपूर्ण मतदान कराने की तैयारियों में जुटा हुआ है. मतदाताओं में भी इस बार काफी उत्साह देखने को मिल रहा है. खासकर पहली बार वोट डालने वाले युवा वोटरों में जोश है. महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय दिख रही है वे घरेलू चर्चाओं में भी अब राजनीतिक विषयों पर खुलकर बात कर रही हैं. कुल मिलाकर, सुपौल जिले में चुनावी बयार अब तेज आंधी में बदलने लगी है. हर दल और उम्मीदवार अपने-अपने तरीके से मतदाताओं को रिझाने में जुटा है. अब देखना दिलचस्प होगा कि 11 नवंबर को जनता किस पर भरोसा जताती है और किसे नकार देती है.
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