जिलेवासियों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रहा डायलिसिस सेंटर

लॉजिस्टिक व संसाधन उपलब्धता

– जुलाई 2020 में अपोलो डायलिसिस सेवा का किया गया शुभारंभ सुपौल. जिले के नागरिकों के लिए एक जीवनदायिनी सुविधा के रूप में, सदर अस्पताल, सुपौल में अपोलो डायलिसिस सेवा जुलाई 2020 से सशक्त रूप से कार्यरत है. इस सेवा की शुरुआत तब हुई थी, जब यहां पुरानी पथरी या गुर्दा विकार के रोगियों के लिए नियमित और आवश्यक डायलिसिस सेवा की बहुत कमी थी. सदर अस्पताल में संचालित डायलिसिस केंद्र कुल 06 बेड क्षमता का है. इनमें से 05 बेड सामान्य (निगेटिव रोगी) के लिए हैं और 01 बेड विशेष रूप से हेपेटाइटिस सी रोगियों के लिए आरक्षित है, ताकि संक्रमण का जोखिम कम किया जा सके. डायलिसिस सेंटर में वर्तमान में 01 डॉक्टर, 05 डायलिसिस टेक्नीशियन, 01 नर्स और 01 सफाई कर्मचारी कार्यरत हैं. राशन कार्ड धारियों को यह सेवा निःशुल्क दी जाती है. जिन मरीजों के पास राशन कार्ड नहीं है, उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क 1797 रुपए प्रति डायलिसिस सत्र के हिसाब से देना होता है. यह दर इलाके में कार्यरत अन्य निजी केंद्रों की तुलना में काफी कम है और इसे सामाजिक न्याय की भावना से देखा जाता है. सदर अस्पताल में स्थापित डायलिसिस सेंटर में वर्ष 2020 में 269 मरीजों का डायलिसिस हुआ. वर्ष 2021 में 1842, वर्ष 2022 में 3240, वर्ष 2023 में 3775,वर्ष 2024 में 4695 एवं वर्ष 2025 में 29 अक्टूबर तक 4542 मरीजों का डायलिसिस हुआ है. डायलिसिस जीवनरक्षक उपचार है विशेषकर उन रोगियों के लिए जो गुर्दे की विफलता की स्थिति में हैं. यदि नियमित रूप से डायलिसिस उपचार न मिले, तो जीवन संकट में पड़ सकता है. ऐसे में, इस सुविधा की उपलब्धता ने सुपौल और आसपास के ग्रामीण एवं हाशिए पर बसे इलाकों के लोगों के लिए राहत का स्रोत बनकर कार्य किया है. निःशुल्क सेवा (राशन कार्ड धारियों को) और न्यूनतम शुल्क (अन्य मरीजों को) की नीति इस पहल को सामाजिक स्वास्थ्य न्याय के दृष्टिकोण से विशेष बनाती है. यह उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण है, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और जीवनरक्षक चिकित्सा तक पहुंचने में असमर्थ होते है. संख्या में बेतहाशा वृद्धि आंकड़ों से स्पष्ट है कि मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. प्रति वर्ष हजारों सत्र दर्ज होने से यह संभावना है कि यदि संसाधन नहीं बढ़ाए गए, तो भीड़ और लंबी प्रतीक्षा अवधि बन सकती है. एक ही डॉक्टर, सीमित नर्स और सफाईकर्मी के साथ इतने मरीजों की देखभाल करना दबावपूर्ण हो जाता है. टेक्नीशियन भी अधिक काम का बोझ झेलते हैं. लॉजिस्टिक व संसाधन उपलब्धता डायलिसिस के लिए स्वच्छ पानी, बिजली आपूर्ति, सिरिंज, फिल्टर, दवाएं आदि समय पर उपलब्ध होना अनिवार्य है. किसी एक कमी से सेवा बाधित हो सकती है. जानकारों की माने तो सदर अस्पताल में स्थापित अपोलो डायलिसिस सेवा एक प्रेरणादायक पहल है. यह सुविधा न केवल गुर्दा रोगियों को जीवनदान देती है, बल्कि सामाजिक न्याय का उदाहरण भी है जहां आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निःशुल्क या न्यूनतम शुल्क पर जीवनरक्षक सेवा मिली है. आंकड़े बताते हैं कि मांग निरंतर बढ़ रही है और इस सेवा ने स्थानीय लोगों की जीवन गुणवत्ता में सुधार किया है. बताया कि चुनौतियां कम नहीं हैं संसाधन, मानव शक्ति, वित्तीय स्थिरता और संचालन की निरंतरता लेकिन यदि ठोस योजना, सरकारी सहयोग और समुदाय की भागीदारी हो, यह सेवा आने वाले वर्षों में और भी सशक्त एवं विश्वसनीय बन सकती है. कहते है सीएस सिविल सर्जन डॉ ललन कुमार ठाकुर ने बताया कि सदर अस्पताल में अपोलो डायलिसिस सेवा ने जिले के सैकड़ों मरीजों को नई जिंदगी दी है. हमारी कोशिश है कि भविष्य में और बेड, तकनीशियन तथा आधुनिक मशीनों की व्यवस्था कर इसे और सशक्त बनाया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >