अचानक एक्टिव हुए उज्ज्वला योजना के लाभुक, गैस की बढ़ी डिमांड

10-15 साल पुराने हालात की याद दिलाने लगी स्थिति

– 10-15 साल पुराने हालात की याद दिलाने लगी स्थिति सुपौल. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध जैसे हालात का असर अब स्थानीय बाजारों और आम लोगों की चिंताओं में भी दिखाई देने लगा है. जिले में इन दिनों रसोई गैस को लेकर अचानक हाहाकार मच गया है. गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं. लोग सुबह जल्दी ही सिलिंडर बुक कराने और लेने के लिए लाइन में खड़े नजर आ रहे हैं. इस दृश्य ने कई लोगों को 10 से 15 साल पहले की स्थिति की याद दिला दी है, जब गैस सिलिंडर लेने के लिए घंटों लाइन में लगना आम बात हुआ करती थी. जिले के कई गैस एजेंसियों के बाहर इन दिनों भीड़ का नजारा देखने को मिल रहा है. उपभोक्ता सुबह से ही अपने सिलेंडर के साथ एजेंसी के बाहर पहुंच जाते हैं और अपनी बारी का इंतजार करते हैं. कई लोगों का कहना है कि उन्हें डर है कि अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण कहीं गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो जाए, इसलिए वे पहले से ही सिलेंडर भरवाने की कोशिश कर रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से गैस की आपूर्ति सामान्य थी और लोग आसानी से सिलेंडर प्राप्त कर लेते थे, लेकिन मौजूदा हालात में अचानक बढ़ी भीड़ ने पुराने दिनों की याद ताजा कर दी है. एक उपभोक्ता ने बताया कि पहले भी ऐसी स्थिति होती थी जब सुबह-सुबह लाइन में लगना पड़ता था और कई बार पूरा दिन इंतजार करना पड़ता था. जानकारों का मानना है कि गैस की इस अचानक बढ़ी मांग के पीछे एक बड़ा कारण उज्ज्वला योजना के गैस कनेक्शनों का सक्रिय होना भी है. दरअसल, कई ऐसे उपभोक्ता हैं जो छह महीने या साल में कभी-कभार ही गैस सिलेंडर भरवाते थे. लेकिन हाल के दिनों में वे भी नियमित रूप से सिलेंडर लेने लगे हैं, जिससे मांग में अचानक बढ़ोतरी हो गई है. गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि आपूर्ति सामान्य है, लेकिन मांग अचानक बढ़ जाने के कारण एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है. उनका कहना है कि उज्ज्वला योजना के तहत बड़ी संख्या में कनेक्शन दिए गए थे, जिनमें से कई अब सक्रिय हो गए हैं. इसके कारण भी सिलेंडर की मांग पहले की तुलना में अधिक हो गई है. प्रशासन और एजेंसी संचालकों ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और आवश्यकता के अनुसार ही गैस सिलिंडर बुक करें. उनका कहना है कि गैस की आपूर्ति नियमित रूप से की जा रही है. किसी प्रकार की कमी नहीं है. फिलहाल सुपौल में गैस एजेंसियों के बाहर उमड़ रही भीड़ यह साफ संकेत दे रही है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर आम लोगों की सोच और रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पड़ने लगा है.

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