सुपौल में हरदी वन दुर्गा मंदिर में उमड़ती है हजारों श्रद्धालुओं की भीड़, पांडवों से जुड़ी है आस्था

Aaj KA Darshan: सुपौल का हरदी वन दुर्गा स्थान सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और पौराणिक मान्यताओं का अद्भुत संगम है. मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां मां वन दुर्गा की स्थापना की थी.

Aaj KA Darshan: राजीव कुमार झा की रिपोर्ट. हरदी वन दुर्गा मंदिर उत्तर बिहार के प्रमुख धार्मिक स्थलों में अपनी खास पहचान रखता है. जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर सुपौल-सिंहेश्वर मुख्य मार्ग पर स्थित यह ऐतिहासिक मंदिर हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है. यहां हर दिन भक्तों की भीड़ उमड़ती है, जबकि मंगलवार और शुक्रवार को मंदिर परिसर पूरी तरह श्रद्धालुओं से भर जाता है. स्थानीय मान्यताओं और पौराणिक कथाओं के कारण इस मंदिर का महत्व और भी बढ़ जाता है.

पांडवों से जुड़ी है मंदिर की ऐतिहासिक मान्यता

हरदी वन दुर्गा मंदिर को लेकर मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान विराटनगर जाने के क्रम में पांडव इस क्षेत्र में पहुंचे थे. उसी दौरान उन्होंने मां वन दुर्गा की स्थापना की थी. तभी से यहां मां भगवती की पूजा लगातार होती आ रही है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि इतिहासकारों और पौराणिक ग्रंथों में भी इस स्थल का उल्लेख मिलता है. यही वजह है कि यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

मां वन दुर्गा के दरबार से खाली हाथ नहीं लौटता कोई

श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां वन दुर्गा के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है. यही कारण है कि सुपौल ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं.

मंदिर परिसर में सालों भर छाग बलि देने की परंपरा भी निभाई जाती है. विशेष अवसरों और पर्वों के दौरान यहां भक्ति और श्रद्धा का अनोखा माहौल देखने को मिलता है.

खुले आसमान के नीचे विराजमान थीं मां वन दुर्गा

ग्रामीणों के अनुसार हजारों वर्ष पहले एक विशाल वटवृक्ष के नीचे मां भगवती की पिंडी स्थापित की गई थी. कई बार मंदिर निर्माण की कोशिश हुई, लेकिन किसी कारणवश कार्य पूरा नहीं हो सका. करीब आठ साल पहले ग्रामीणों की मन्नत और सहयोग से भव्य मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हुआ.

स्थानीय लोगों की मान्यता है कि मां वन दुर्गा खुले आसमान के नीचे रहना पसंद करती थीं. हालांकि अब श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए मंदिर को विकसित किया जा रहा है.

Also Read:बिहार में ट्रैफिक नियम तोड़ा तो 45 दिन में भरें जुर्माना, नहीं तो RC-DL होंगे रद्द, सरकार का बड़ा फैसला

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Pratyush prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >