Aaj Ka Darshan : राघोपुर (सुपौल) से आशुतोष झा की रिपोर्ट: सुपौल जिले के राघोपुर प्रखंड स्थित गणपतगंज बाजार का सार्वजनिक दुर्गा मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करीब 150 वर्षों से लोगों की आस्था, विश्वास और चमत्कारों का केंद्र बना हुआ है. मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से मां दुर्गा के दरबार में पहुंचता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है. यही वजह है कि यहां सालभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है और कोई भी भक्त मां के दरबार से खाली हाथ नहीं लौटता.
आस्था से जुड़ी है 150 वर्षों की विरासत
गणपतगंज का यह प्राचीन दुर्गा मंदिर इलाके की धार्मिक पहचान माना जाता है. मंदिर पूजा समिति के वरिष्ठ सलाहकार सह कमेटी सदस्य उद्योतचंद कोठारी उर्फ बाबला बाबू बताते हैं कि इस मंदिर की स्थापना करीब 150 वर्ष पूर्व तत्कालीन हरावत राज के जमींदार गणपत सिंह और नरपत सिंह ने कराई थी.शुरुआत में यह मंदिर देवीपुर पंचायत के कोरियापट्टी गांव में स्थित था.
लेकिन उस समय सड़क मार्ग की स्थिति बेहद खराब थी और रियासत मुख्यालय से दूरी भी अधिक थी. इसी कारण लगभग 116 वर्ष पहले मां दुर्गा की प्रतिमा को गणपतगंज लाकर स्थापित किया गया. इसके बाद से मंदिर की ख्याति लगातार बढ़ती चली गई और यह पूरे इलाके की आस्था का बड़ा केंद्र बन गया.
जब मंदिर परिसर में सुनाई देती है दिव्य ध्वनि
स्थानीय लोगों के बीच इस मंदिर को लेकर कई रहस्यमयी और चमत्कारी कथाएं भी प्रचलित हैं. ग्रामीणों का दावा है कि कई बार देर रात मंदिर परिसर में मां के चरणों में घुंघरुओं की छनक और ढोल-नगाड़ों की दिव्य आवाजें सुनाई देती हैं. श्रद्धालु इसे मां दुर्गा की विशेष कृपा और चमत्कार मानते हैं.
यही कारण है कि आसपास के गांवों के अलावा दूसरे जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां माथा टेकने पहुंचते हैं. सामान्य दिनों में भी मंदिर परिसर में भक्तों की अच्छी-खासी भीड़ रहती है, जबकि शारदीय नवरात्र और दशहरा के दौरान यहां श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ता है.
श्रद्धा, विश्वास और भक्ति का जीवंत केंद्र
गणपतगंज दुर्गा मंदिर आज भी लोगों की आस्था को जीवित रखे हुए है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां दुर्गा अपने भक्तों की हर मुराद सुनती हैं. शायद यही वजह है कि समय बदलने के बावजूद इस मंदिर की लोकप्रियता और श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ती जा रही है.
