Supaul News : नेपाल स्थित कोसी बराज से पानी का डिस्चार्ज भले ही कम हो गया हो, लेकिन कोसी नदी का रौद्र रूप अभी भी शांत नहीं हुआ है. सुपौल जिले के सरायगढ़ प्रखंड की ढोली पंचायत में नदी का कटाव लगातार तबाही मचा रहा है. हालात ऐसे हैं कि कुछ ही घंटों में 45 परिवारों के फूस के घर नदी में समा गए और वर्षों की मेहनत से बनाया गया आशियाना आंखों के सामने बह गया.
अब इन परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर छिपाने की जगह और दो वक्त की रोटी की है. कई लोग अपने टूटे घरों के अवशेषों से बचा-खुचा सामान निकालने में जुटे हैं, जबकि कई परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर चुके हैं. प्रभावित ग्रामीण अब प्रशासन से राहत सामग्री और स्थायी मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं.
ढोली पंचायत में लगातार बढ़ रहा कटाव
पूर्वी कोसी तटबंध के अंदर स्थित ढोली पंचायत लंबे समय से कटाव की समस्या झेल रही है. इस बार भी नदी के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण कटाव की रफ्तार तेज हो गई.
स्थानीय लोगों का कहना है कि कोसी बराज से पानी का डिस्चार्ज कम होने के बावजूद नदी की धारा किनारों को तेजी से काट रही है. इसी वजह से कई घर एक-एक कर नदी में समाते चले गए.
45 परिवारों का उजड़ गया आशियाना
कटाव की चपेट में आकर वीरेंद्र सिंह, लक्ष्मण सिंह, रविंद्र सिंह, शकुंतला देवी, हीरालाल सिंह, भूषण सिंह, शिव शंकर कुमार, रविकांत सिंह, बालमुकुंद सिंह, कृपानंद सिंह, कृष्ण देव सिंह, बबीता देवी समेत कुल 45 परिवारों के घर नदी में समा गए.
इन परिवारों ने वर्षों की मेहनत से अपने घर बनाए थे, लेकिन कुछ ही समय में सब कुछ नदी की तेज धारा में बह गया. अब प्रभावित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं.
भोजन और आश्रय का गहराया संकट
घर उजड़ने के बाद प्रभावित परिवारों के सामने केवल रहने की समस्या ही नहीं, बल्कि भोजन और दैनिक जरूरतों का भी संकट खड़ा हो गया है.
कई परिवार सुरक्षित स्थानों पर पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ लोग अब भी अपने घरों से बचाए जा सकने वाले सामान को निकालने की कोशिश कर रहे हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से पॉलीथिन शीट, खाद्यान्न और अन्य राहत सामग्री जल्द उपलब्ध कराने की मांग की है.
जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से लगाई गुहार
ढोली पंचायत की मुखिया सरस्वती देवी और पूर्व मुखिया सुरेश प्रसाद सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से तत्काल राहत कार्य शुरू करने की मांग की है.
उनका कहना है कि विस्थापित परिवारों के सामने रहने और खाने की गंभीर समस्या है. यदि समय पर राहत नहीं पहुंची तो स्थिति और गंभीर हो सकती है.
प्रशासन ने क्या कहा?
अंचल निरीक्षक दशरथ मरैया ने बताया कि कटाव स्थल का निरीक्षण किया जा चुका है. जांच में 45 परिवारों के विस्थापित होने की पुष्टि हुई है और इसकी रिपोर्ट अंचल कार्यालय को भेज दी गई है.
वहीं अंचलाधिकारी कुणाल गौरव ने बताया कि प्रभावित परिवारों में कुछ लोगों को पॉलीथिन शीट उपलब्ध करा दी गई है. शेष परिवारों को भी जल्द सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और राहत कार्य जारी है.
Supaul News: क्यों बढ़ रही है चिंता?
कोसी नदी को लंबे समय से बिहार की सबसे संवेदनशील नदियों में माना जाता है. हर वर्ष मानसून के दौरान बाढ़ और कटाव हजारों लोगों के लिए संकट लेकर आते हैं. इस बार भी जलस्तर में उतार-चढ़ाव ने तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है.
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल तत्काल राहत ही नहीं, बल्कि कटाव प्रभावित क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक सुरक्षा उपाय और पुनर्वास योजना भी जरूरी है. फिलहाल ढोली पंचायत के प्रभावित परिवार प्रशासन से शीघ्र राहत और सुरक्षित पुनर्वास की उम्मीद लगाए हुए हैं.
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