प्रभात पड़ताल: जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर 428 बच्चे, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
राघोपुर के उत्क्रमित मध्य विद्यालय हुसैनाबाद की बदहाल स्थिति ने खोली सरकारी शिक्षा व्यवस्था की पोल
– राघोपुर के उत्क्रमित मध्य विद्यालय हुसैनाबाद की बदहाल स्थिति ने खोली सरकारी शिक्षा व्यवस्था की पोल
आशुतोष झा, राघोपुर
प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय हुसैनाबाद की बदहाल स्थिति ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है. एक ओर सरकार सरकारी विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के बड़े-बड़े दावे कर रही है. वहीं दूसरी ओर इस विद्यालय में बच्चे भय और असुरक्षा के माहौल में पढ़ाई करने को मजबूर हैं. विद्यालय में कुल 428 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. सबसे गंभीर समस्या विद्यालय भवन की जर्जर छत है. जो किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है. कई कक्षाओं की छत टूटने की कगार पर है. जिसके कारण बच्चे और शिक्षक कक्षा के भीतर बैठने से डरते हैं. हालात इतने खराब हैं कि कई बच्चों की पढ़ाई बरामदे और खुले आसमान के नीचे कराई जा रही है. बारिश और तेज धूप के दौरान बच्चों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है. फिर भी मजबूरी में पढ़ाई जारी है. अभिभावकों में है डर का माहौलविद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों में भी लगातार भय बना हुआ है. अभिभावकों का कहना है कि वे हर दिन इस डर में रहते हैं कि कहीं स्कूल की छत गिरने से कोई बड़ा हादसा न हो जाए. शिक्षक और शिक्षिकाएं भी भय के माहौल में बच्चों को पढ़ाने के लिए विवश हैं. विद्यालय प्रशासन के अनुसार जर्जर भवन की जानकारी कई बार विभागीय अधिकारियों को दी जा चुकी है. लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. इससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.विद्यालय की बदहाली केवल भवन तक सीमित नहीं है. यहां मिड-डे मील व्यवस्था भी पूरी तरह प्रभावित है. भोजन के लिए समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बच्चों को बरामदे और खुले स्थान पर बैठाकर खाना खिलाया जाता है. धूल-गर्दे के बीच भोजन करने से बच्चों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है. बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है. जब बच्चों को भोजन कराने के लिए सुरक्षित स्थान तक उपलब्ध नहीं रहता. 428 बच्चे पर एक शौचालय विद्यालय में स्वच्छता की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है. 428 बच्चों के लिए केवल एक शौचालय उपलब्ध है, जिससे छात्र-छात्राओं को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. विशेष रूप से छात्राओं के लिए यह समस्या गंभीर बनी हुई है. इसके अलावा विद्यालय में पेयजल व्यवस्था भी लगभग ठप है. परिसर में लगी पानी की टोटियां टूटी हुई है. जो कई दिनों से बंद पड़ी है. ऐसे में बच्चों को स्वच्छ पेयजल तक नहीं मिल पा रहा. सुरक्षा का नहीं रखा जा रहा ख्यालविद्यालय परिसर में बाउंड्री वॉल नहीं होने के कारण बच्चों की सुरक्षा भी खतरे में है. खुला परिसर होने से छोटे बच्चे कभी-कभी विद्यालय से बाहर निकल जाते हैं. जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे चल रही है. विभाग को दी गयी है लिखित जानकारी : प्रधानाध्यापिकाविद्यालय की प्रधानाध्यापिका कुमारी सुलेखा रानी ने बताया कि जर्जर छत की वजह से बच्चों को बरामदे में बैठाकर पढ़ाई करानी पड़ रही है. उन्होंने कहा कि विद्यालय में केवल एक शौचालय है. बाउंड्री नहीं होने के कारण बच्चों पर लगातार निगरानी रखनी पड़ती है. प्रधानाध्यापिका ने जानकारी दी कि विद्यालय की खराब स्थिति को लेकर 27 जनवरी 2026 को जिला शिक्षा पदाधिकारी सुपौल को लिखित आवेदन दिया गया था. लेकिन अब तक विभाग की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है.वहीं इस मामले पर प्रतिक्रिया देते बीईओ सुनील कुमार देव ने कहा कि अगर इस तरह की स्थिति है तो विद्यालय का विजिट कर मामले कि जांच की जाएगी.