गैर इरादतन हत्या मामले में 10 साल की सजा

पक्ष की ओर से अधिवक्ता विनोद कांत झा ने बहस में हिस्सा लिया

– प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने सुनायी सजा सुपौल. करीब नौ वर्ष पुराने गैर इरादतन हत्या मामले में मंगलवार को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनंत सिंह की अदालत ने एक आरोपित को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई. यह मामला मरौना थाना कांड संख्या 56/17 एवं सत्रवाद संख्या 252/17 से संबंधित है. घटना में कुल्हरिया गांव निवासी जयनारायण साह को मारपीट कर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था, जिनकी बाद में इलाज के दौरान पटना में मौत हो गई थी. मृतक की पत्नी तारा देवी द्वारा दर्ज कराए गए मामले के अनुसार 09 मई 2017 की शाम करीब पांच बजे वे अपनी पति के साथ घर के आंगन में बैठे थे. इसी दौरान गांव के ही गंगा प्रसाद साह अपने परिजनों के साथ वहां पहुंचे और गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी. आरोप है कि गंगा प्रसाद साह ने डंडे से जयनारायण साह के सिर पर वार किया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनकी मौत हो गई. सुनवाई के दौरान कुल 10 गवाहों की गवाही हुई, जिसमें 07 गवाह अभियोजन पक्ष और 03 गवाह बचाव पक्ष से प्रस्तुत किए गए. अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक राजेश कुमार सिंह, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विनोद कांत झा ने बहस में हिस्सा लिया. कोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के तहत गंगा प्रसाद साह को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जुर्माना नहीं देने पर दोषी को अतिरिक्त 6 माह की सजा भुगतनी होगी. गौरतलब है कि इस मामले में कोर्ट ने 18 मार्च को ही आरोपी को दोषी करार दे दिया था, जिसके बाद सजा पर अंतिम फैसला मंगलवार को सुनाया गया.

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