सीवान में वित्तरहित शिक्षकों को वेतनमान देने की घोषणा पर जताया आभार, जीरादेई में फोरम की बैठक

Vitta Rahit Shikshak: मुख्यमंत्री द्वारा वित्तरहित शिक्षकों को वेतनमान देने की घोषणा पर शिक्षकों ने आभार व्यक्त किया है. जीरादेई में आयोजित बैठक में शिक्षकों ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि को अपने लंबे संघर्ष का परिणाम बताया. हालांकि, उन्होंने पीएफ, पेंशन और सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा जैसी अन्य मांगों पर भी जोर दिया.

Vitta Rahit Shikshak: जीरादेई प्रखंड क्षेत्र के नरेंद्र पुर गांव में अमर शहीद उमाकांत सिंह की प्रतिमा के समीप रविवार को अनुदान नहीं, वेतनमान फोरम की बैठक आयोजित की गयी. बैठक की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. कृष्ण कुमार सिंह ने की. इसमें बड़ी संख्या में वित्तरहित शिक्षकों ने भाग लिया. शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा वित्तरहित शिक्षकों को वेतनमान देने की घोषणा किए जाने पर शिक्षकों ने खुशी जतायी और मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया. शिक्षकों ने इसे वर्षों से जारी अपने संघर्ष की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया.

मुख्यमंत्री और विधान पार्षद के प्रति जताया आभार

बैठक में विधान पार्षद नवल किशोर यादव और अनुदान नहीं, वेतनमान फोरम के प्रांतीय संयोजक रोशन कुमार के प्रति भी शिक्षकों ने आभार जताया. शिक्षकों ने कहा कि वे लंबे समय से सम्मानजनक वेतनमान और स्थायी आर्थिक सुरक्षा की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं. ऐसे में वेतनमान देने की घोषणा से शिक्षकों की उम्मीदें बढ़ी हैं.

शिक्षकों ने कहा कि वर्षों से सीमित संसाधनों के बीच वे विद्यार्थियों को शिक्षा देने का काम कर रहे हैं. वेतनमान की घोषणा से उन्हें आर्थिक स्थिरता मिलने की उम्मीद जगी है. हालांकि, शिक्षकों ने सरकार से घोषणा को जल्द लागू करने की मांग भी की.

पीएफ और पेंशन की सुविधा देने की मांग

अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य डॉ. कृष्ण कुमार सिंह ने कहा कि वित्तरहित शिक्षकों की समस्याओं को लेकर फोरम लगातार संघर्ष करता रहा है. सरकार की ओर से वेतनमान देने की घोषणा स्वागतयोग्य कदम है. उन्होंने कहा कि शिक्षकों की समस्या का स्थायी समाधान केवल वेतनमान से नहीं होगा, बल्कि उन्हें पीएफ, पेंशन और सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक आर्थिक सुरक्षा भी मिलनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष विद्यार्थियों को शिक्षित करने और समाज निर्माण में लगाए हैं. ऐसे में उनके भविष्य को असुरक्षित नहीं छोड़ा जा सकता. सरकार को शिक्षकों की सेवा अवधि, अनुभव और योगदान को ध्यान में रखते हुए समग्र नीति बनानी चाहिए.

सरकारी आदेश जारी करने की मांग

बैठक में शिक्षकों ने मुख्यमंत्री से वेतनमान देने की घोषणा को शीघ्र सरकारी आदेश और प्रभावी नियमावली का रूप देने की मांग की. शिक्षकों ने कहा कि घोषणा के बाद अब इसके क्रियान्वयन की दिशा में जल्द कदम उठाया जाना चाहिए, ताकि वर्षों से आर्थिक असुरक्षा का सामना कर रहे शिक्षकों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके.

इसके साथ ही शिक्षकों ने पीएफ, पेंशन, सेवा सुरक्षा और नियमित भुगतान समेत अन्य लंबित समस्याओं के समाधान की मांग भी उठायी. शिक्षकों का कहना था कि वेतनमान के साथ सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की व्यवस्था भी जरूरी है.

संघर्ष की मंजिल नहीं, पहला महत्वपूर्ण कदम

बैठक में शिक्षकों ने कहा कि वेतनमान की घोषणा उनके लंबे संघर्ष की मंजिल नहीं है, बल्कि सम्मानजनक और सुरक्षित शिक्षक जीवन की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने सरकार से अपेक्षा जतायी कि शिक्षकों की अन्य लंबित मांगों पर भी सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा.

शिक्षकों ने कहा कि वे विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे हैं और आगे भी निभाते रहेंगे. सरकार को भी उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए ठोस और स्थायी व्यवस्था करनी चाहिए.

ये शिक्षक रहे मौजूद

बैठक में धनंजय श्रीवास्तव, घनश्याम सिन्हा, संतोष चौबे, भरत पाण्डेय, कल्याण यादव, अंगद प्रसाद, ओमप्रकाश कुशवाहा, ब्लेन्दु ठाकुर, संदीप सिंह, अनु तिवारी और जागनारायण सिंह समेत बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे.

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By मनीष गिरि

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