चेकपोस्ट पर नहीं हो रही है वाहनों की जांच

जिले में शराब की खेप पुलिस की नाक के नीचे से कैसे गुजर रही है इसका उदाहरण मैरवा थाना के स्याही पुल चेकपोस्ट पर रविवार की सुबह देखने को मिला. बार्डर पर यूपी की तरफ से आने और बिहार की तरफ से जाने वाली गाड़ियों की जांच के लिए एक सेक्शन फोर्स की तैनाती की गई है.

प्रतिनिधि, सीवान. जिले में शराब की खेप पुलिस की नाक के नीचे से कैसे गुजर रही है इसका उदाहरण मैरवा थाना के स्याही पुल चेकपोस्ट पर रविवार की सुबह देखने को मिला. बार्डर पर यूपी की तरफ से आने और बिहार की तरफ से जाने वाली गाड़ियों की जांच के लिए एक सेक्शन फोर्स की तैनाती की गई है. लेकिन यहां तैनात जवान व पुलिस पदाधिकारी अपनी ड्यूटी में घोर लापरवाही करते हुए वाहनों की जांच करने की जगह नदारद पाये गये. सुबह 9:46 मिनट पर यूपी की तरफ से एक ऑटो गाड़ी, एक हाइवा ,स्कार्पियो सहित कई वाहनें जिस पर यूपी का नंबर अंकित था वह बिना किसी जांच पड़ताल के आसानी से बिहार में प्रवेश कर गयी और बॉर्डर छोड़ सुरक्षा कर्मी नदारद रहे. इतना ही नहीं बार्डर पर करीब 10 मिनट तक जब प्रभात खबर की टीम ने वाहनों के जांच की पड़ताल की तो पाया कि 10 मिनट प में यूपी और बिहार की तरफ से करीब सात चार पहिया गाड़ियां गुजरी और किसी भी वाहन की जांच सुरक्षा कर्मियों द्वारा नहीं की गई. ड्यूटी में लापरवाही का नतीजा है कि जिले में आसानी से विभिन्न थाना क्षेत्रों में शराब की बिक्री हो रही है और पुलिस शिथिल बनी हुई है. बार्डर पर अक्सर होती है लापरवाही- बता दें कि बार्डर पर वाहनों की जांच को लेकर अक्सर लापरवाही बरती जाती है. यहीं कारण था कि कुछ महीने पूर्व जिलाधिकारी मुकुल कुमार गुप्ता ने बार्डर पर बिना सूचना के पहुंच वहां जांच और सुरक्षा कर्मियों की गतिविधि की जांच की थी. जहां लापरवाही पाए जाने पर उन्होंने बार्डर पर तैनात सभी होमगार्ड और बिहार पुलिस के जवानों को फटकार लगाते हुए उन्हें मुख्यालय में रिपोर्ट करने का आदेश जारी किया था. 24 अक्टूबर के बाद उत्पाद विभाग ने नहीं पकड़ी शराब- जिले में विधानसभा चुनाव का प्रचार प्रसार अपने चरम पर था. इस दौरान जिले के चेकपोस्टो पर आइटीबीपी,सीआरपीएफ सहित जिले बल की तैनाती की गई थी. उसके बावजूद भी शराब की तस्करी जारी थी. लेकिन उत्पाद विभाग 24 अक्टूबर से 9 नवम्बर तक यानी 16 दिनों में एक भी लीटर शराब नहीं पकड़ सकी. जबकि मतदान संपन्न हुए चार दिन हो गए हैं. ऐसा नही हैं कि उत्पाद विभाग की टीम क्षेत्र में छापेमारी नही करती हैं. टीम की तकरीबन दर्जनों गाड़ियां, डॉग स्क्वाड के साथ प्रतिदिन निकलती हैं लेकिन रिजल्ट शून्य रहता हैं. चेकिंग के नाम पर होती हैं खानापूर्ति बताया जाता हैं कि बिहार यूपी की सीमाएं पर शराब तस्करी के चेकिंग के नाम पर केवल कोरम पूरा होता हैं. स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां चुनाव में सख्ती थी.लेकिन अन्य दिनों का स्थिति बहुत ही गड़बड़ हैं. साहब लोगो के आने के बाद कुछ देर तक जांच होती हैं फिर वही लापरवाही शुरू हो जाती हैं. बोले अधिकारी ऐसा नही हैं कि चेकपोस्ट पर जवान और पदाधिकारी नही हैं. यदि लापरवाही की शिकायतें प्राप्त होती हैं तो कार्रवाई की जायेगी. रूपेश कुमार, उत्पाद इंस्पेक्टर, सीवान

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Author: DEEPAK MISHRA

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