धान खरीद और चावल आपूर्ति में पारदर्शिता का होगा पालन

जिले में धान की खरीद और चावल आपूर्ति की प्रक्रिया को पारदर्शी एवं नियम सम्मत बनाने के लिए सहकारिता विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है. पटना के निबंधक (सहयोग समितियां) की अध्यक्षता में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद, जिला सहकारिता पदाधिकारी सौरभ कुमार ने सभी सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों को नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं.

प्रतिनिधि, सीवान. जिले में धान की खरीद और चावल आपूर्ति की प्रक्रिया को पारदर्शी एवं नियम सम्मत बनाने के लिए सहकारिता विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है. पटना के निबंधक (सहयोग समितियां) की अध्यक्षता में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद, जिला सहकारिता पदाधिकारी सौरभ कुमार ने सभी सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों को नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. उन्होंने स्पष्ट किया है कि धान खरीद में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जायेगी. गैर-रैयत किसानों के लिए नए नियम समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई कि कई जिलों में गैर-रैयत किसानों द्वारा धान खरीद के लिए आवश्यक ””संयुक्त प्रतिहस्ताक्षरित घोषणा पत्र”” अपलोड नहीं किया जा रहा है. मार्गदर्शिका के अनुसार यह पूरी तरह अनिवार्य है. नियम: गैर-रैयत किसानों को किसान सलाहकार या कृषि समन्वयक के साथ-साथ वार्ड सदस्य के संयुक्त हस्ताक्षर वाला घोषणा पत्र देना होगा. विकल्प: यदि वार्ड सदस्य उपलब्ध नहीं हैं, तो मुखिया, पंचायत समिति सदस्य या जिला परिषद सदस्य के हस्ताक्षर मान्य होंगे. विभाग ने सभी पैक्स को इस नियम का अक्षरशः पालन करने की हिदायत दी है. भूमि विवरण में हेराफेरी पर रोक जांच में एक और गंभीर समस्या यह पाई गई कि कुछ किसान पंजीकरण के समय अपनी भूमि का रकबा वास्तविकता से कहीं अधिक दर्ज कर रहे हैं. इससे सरकारी रिकॉर्ड में कुल रकबा कृत्रिम रूप से बढ़ा हुआ दिख रहा है. कार्रवाई: पैक्स के माध्यम से किसानों को जागरूक किया जाएगा और भूमि विवरण की गहन जांच की जाएगी. सुधार: जिन किसानों ने गलत विवरण दिया है, उनकी पहचान कर डेटा में सुधार किया जाएगा. एक सप्ताह के भीतर मांगी गई रिपोर्ट जिला सहकारिता पदाधिकारी ने सभी प्रखंड पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अब तक हुई धान खरीद का भौतिक सत्यापन करें. सत्यापन के बाद एक सप्ताह के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन जिला कार्यालय को सौंपना अनिवार्य है. इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजना का लाभ केवल वास्तविक और पात्र किसानों को ही मिले. चेतावनी: विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि निर्धारित दिशा-निर्देशों के पालन में कोताही बरती गई, तो संबंधित पैक्स और अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जायेगी.

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Author: DEEPAK MISHRA

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