आज एक लाख श्रद्धालु करेंगे की हंसनाथ का जलाभिषेक

प्रखंड के सोहगरा बाबा हंसनाथ मंदिर में सावन की शिवरात्रि पर बुधवार को जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है. मंदिर समिति के अनुसार सावन माह की शिवरात्रि पर लगभग एक लाख से अधिक लोगों का जलाभिषेक करने की उम्मीद है.

प्रतिनिधि. गुठनी. प्रखंड के सोहगरा बाबा हंसनाथ मंदिर में सावन की शिवरात्रि पर बुधवार को जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है. मंदिर समिति के अनुसार सावन माह की शिवरात्रि पर लगभग एक लाख से अधिक लोगों का जलाभिषेक करने की उम्मीद है. पंडित बैकुंठ दुबे ने बताया कि सावन मास की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. ऐसा कहा जाता है कि इस दिन जो भोले बाबा पर जल अर्पित करता है, उसकी भोलेबाबा सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. बाबा हंसनाथ युवा समिति के पंकज सिंह, सुनील यादव, अरविंद पांडेय, आशीष पांडेय, धनु गुप्ता, गोलू पासवान, आतिश गोंड, सोनू ठाकुर, मनीष सिंह, अभिषेक सिंह, रंजीत मद्धेशिया और संतोष गोंड द्वारा जलाभिषेक करने आए दूर दराज के श्रद्धालुओं को ठहरने और भोजन की व्यवस्था किया गया है.इस बार सावन शिवरात्रि ग्रहों का उत्तम संयोग रहेगा. इस समय गुरु मिथुन राशि में, सूर्य कर्क राशि में शनि मीन राशि में और शुक्र कर्क राशि में है. इसके अलावा ग्रहों के कारण इस दिन सर्वार्थ सिद्धि, गजकेसरी, नवपंचम राजयोग बन रहे हैं. इसके अलावा शिवरात्रि पर भद्रावास योग भी रहेगा. सावन शिवरात्रि पर भद्रा का समय सुबह 5:37 बजे से दोपहर 3:31 बजे तक रहेगा. वैसे तो सावन के पूरे महीने में भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना की जाती है, लेकिन शिवरात्रि पर शिवभक्त शिवालयों में जलाभिषेक कर शिव की पूजा अर्चना करते हैं. इस साल सावन शिवरात्रि की शुरुआत बुधवार को सुबह 4 बजकर 39 मिनट पर होगी. यह तिथि अगले दिन, यानी गुरुवार को अर्धरात्रि में 2 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में श्रद्धालु शिवरात्रि पर ब्रह्म मुहूर्त में भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकते हैं. पौराणिक कथा के मुताबिक सावन की शिवरात्रि को शिव-पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक माना जाता है. यहीं कारण है कि इस दिन की गई उपासना से प्रेम जीवन सुखमय और मनचाहा वर पाने की कामना पूर्ण होती हैं. थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने सुरक्षा की दृष्टि से सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि मंदिर परिसर और भीड़ भाड़ वाली जगहों पर सोने और चांदी से निर्मित आभूषण पहनकर दर्शन करने आने से परहेज करें.

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Author: DEEPAK MISHRA

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