Siwan News : महावीरी झंडा मेला 2026 के दौरान सदर अस्पताल के आपात कक्ष में बेहतर चिकित्सा व्यवस्था के स्वास्थ्य विभाग के दावे पर उस समय सवाल खड़े हो गए, जब मेले में चाकूबाजी की घटना में घायल दो युवकों को इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया गया. घायलों के पहुंचने के समय विशेष ड्यूटी के लिए तैनात तीन चिकित्सकों में से किसी के आपातकालीन कक्ष में मौजूद नहीं होने की बात सामने आयी. इससे मेले के दौरान की गयी चिकित्सा व्यवस्था और ड्यूटी अनुपालन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
तीन डॉक्टरों की लगायी गयी थी विशेष ड्यूटी
असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी के आदेश के आलोक में सदर अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह ने महावीरी झंडा मेला के दौरान आपात कक्ष के लिए विशेष मेडिकल टीम गठित की थी. इसमें सर्जन डॉ. राजीव कुमार रंजन, डॉ. सुनील और डॉ. अनुप कुमार दुबे को शामिल किया गया था.
दोपहर 12 से रात 8 बजे तक रहना था मौजूद
जारी आदेश के अनुसार तीनों चिकित्सकों को 6 सितंबर को दोपहर 12 बजे से रात आठ बजे तक सदर अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में मौजूद रहना था. उन्हें जीवनरक्षक दवाओं और आवश्यक चिकित्सा सामग्री के साथ किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया गया था.
घायल पहुंचे तो डॉक्टरों की मौजूदगी पर उठे सवाल
मेले के दौरान चाकूबाजी में घायल दो युवकों को जब सदर अस्पताल लाया गया, तब विशेष ड्यूटी में तैनात चिकित्सकों की मौजूदगी नहीं दिखी. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिस आपात स्थिति को देखते हुए तीन चिकित्सकों की विशेष ड्यूटी लगायी गयी थी, उसी दौरान आपात कक्ष में उनकी उपलब्धता क्यों नहीं थी.
ड्यूटी अनुपालन और निगरानी पर भी सवाल
आदेश में चिकित्सकों की मौजूदगी का स्पष्ट निर्देश था. इसके बावजूद मौके पर उनकी अनुपस्थिति की बात सामने आने के बाद ड्यूटी अनुपालन और अस्पताल प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है. अब यह स्पष्ट होना जरूरी है कि विशेष ड्यूटी में तैनात चिकित्सक आपात कक्ष में क्यों मौजूद नहीं थे.
अनुपस्थिति की अनुमति ली गयी थी या नहीं?
मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि किसी चिकित्सक को किसी कारण से ड्यूटी स्थल से अनुपस्थित रहना पड़ा था, तो क्या इसके लिए पूर्व अनुमति ली गयी थी. स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन की ओर से इस संबंध में स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है.
