सीवान में टीबी जांच पर संकट, 10 दिनों से सीबीनेट जांच बंद, कार्ट्रिज-चिप की कमी

सीवान जिले में टीबी मरीजों की जांच व्यवस्था जरूरी कंज्यूमेबल्स की कमी से जूझ रही है. सीबीनेट और ट्रूनेट जांच के लिए कार्ट्रिज और चिप उपलब्ध न होने से मरीजों की पहचान में देरी हो रही है, जो टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को प्रभावित कर सकता है. स्वास्थ्य अधिकारी जल्द आपूर्ति की उम्मीद कर रहे हैं.

TB Testing Siwan: जिले में हर महीने करीब 300 नये टीबी मरीज सामने आ रहे हैं. टीबी उन्मूलन को लेकर विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है. बिना लक्षण वाले मरीजों की पहचान के लिए एआई आधारित हैंड हेल्ड एक्स-रे मशीन उपलब्ध है और ओपन आरटी-पीसीआर लैब की स्थापना भी की गयी है. इसके बावजूद जिले की टीबी जांच व्यवस्था जरूरी कंज्यूमेबल्स की कमी से जूझ रही है.

जिला यक्ष्मा केंद्र, मैरवा रेफरल अस्पताल और बसंतपुर सीएचसी में सीबीनेट मशीन से टीबी की जांच होती है, जबकि जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर ट्रूनेट के माध्यम से जांच की जाती है. कार्ट्रिज की कमी के कारण इन तीनों केंद्रों पर पिछले करीब 10 दिनों से सीबीनेट जांच प्रभावित है. वहीं, अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर ट्रूनेट जांच के लिए जरूरी चिप की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है.

माइक्रोस्कोपिक जांच से हो रही मरीजों की पहचान

आणविक जांच प्रभावित होने के कारण कई नये मरीजों की पहचान माइक्रोस्कोपिक जांच के आधार पर कर उपचार शुरू किये जाने की बात सामने आयी है. माइक्रोस्कोपिक जांच से बलगम में टीबी के बैक्टीरिया की मौजूदगी का पता लगाया जा सकता है, लेकिन इससे रिफैम्पिसिन प्रतिरोध की जानकारी नहीं मिलती.

सीबीनेट और ट्रूनेट जैसी आणविक जांच टीबी मरीजों की पहचान के साथ-साथ दवा प्रतिरोध का पता लगाने में भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. रिफैम्पिसिन-रेजिस्टेंट मरीज की समय पर पहचान नहीं होने पर उसके लिए उपयुक्त उपचार तय करने में परेशानी हो सकती है.

अत्याधुनिक सुविधाओं के बावजूद कंज्यूमेबल्स की कमी

जिले में हर माह करीब 300 नये टीबी मरीज मिलने और टीबी उन्मूलन के लिए विशेष अभियान चलाये जाने के बीच जांच के लिए जरूरी कार्ट्रिज और चिप की नियमित उपलब्धता पर सवाल उठ रहे हैं. जिले में एआई आधारित हैंड हेल्ड एक्स-रे मशीन और ओपन आरटी-पीसीआर लैब जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन आणविक जांच के लिए जरूरी कंज्यूमेबल्स की कमी से जांच व्यवस्था प्रभावित हो रही है.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार माइक्रोस्कोपिक जांच की अपनी उपयोगिता है, लेकिन यह मॉलिक्यूलर ड्रग-रेजिस्टेंस टेस्टिंग का विकल्प नहीं है. ऐसे में सीवान में सीबीनेट कार्ट्रिज और ट्रूनेट चिप की आपूर्ति जल्द सुनिश्चित करना जरूरी है.

नमूनों को दूसरे केंद्र भेजने की हो वैकल्पिक व्यवस्था

विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी केंद्र पर आणविक जांच संभव नहीं है, तो मरीजों के नमूने नजदीकी उपलब्ध आणविक जांच केंद्र तक भेजने की वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए. इससे जांच में अनावश्यक देरी को कम किया जा सकता है और दवा प्रतिरोधी टीबी मरीजों की समय पर पहचान संभव होगी.

टीबी उन्मूलन के लक्ष्य के बीच बड़ा सवाल यह है कि अत्याधुनिक मशीनें और लैब उपलब्ध होने के बावजूद जरूरी कंज्यूमेबल्स की कमी से जांच व्यवस्था क्यों प्रभावित हो रही है. समय पर जांच और सही उपचार के लिए कार्ट्रिज और चिप की नियमित आपूर्ति बेहद जरूरी है.

क्या कहते हैं जिम्मेदार

सीवान के सीडीओ डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि कुछ स्वास्थ्य केंद्रों को छोड़कर अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रों पर पिछले करीब 10 दिनों से कार्ट्रिज-चिप खत्म हो गयी है. उन्होंने कहा कि नये मरीजों की जांच माइक्रोस्कोपिक विधि से कर पहचान की जा रही है और दवा दी जा रही है. विशेष परिस्थिति के लिए कुछ कार्ट्रिज एवं चिप बचाकर रखे गये हैं. अगले माह स्टेट से इसकी आपूर्ति आने की उम्मीद है.

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By अमरनाथ शर्मा

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