सीवान सदर अस्पताल में जीवनरक्षक दवाओं की कमी, आपात मरीजों के इलाज पर उठे सवाल

सीवान सदर अस्पताल में जरूरी और जीवनरक्षक दवाओं की गंभीर कमी सामने आई है. मेनीटॉल, पैरासिटामोल IV, डेक्सोना इंजेक्शन जैसी महत्वपूर्ण दवाएं उपलब्ध नहीं हैं. इससे मरीजों के इलाज में भारी दिक्कतें आ रही हैं.

Siwan Sadar Hospital: सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर और नि:शुल्क इलाज उपलब्ध कराने के दावों के बीच सीवान सदर अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. अस्पताल में कई जरूरी और आपातकालीन दवाओं की कमी सामने आयी है. गंभीर मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं और चिकित्सा सामग्री उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

सदर अस्पताल में मेनीटॉल आईवी, पैरासिटामोल आईवी, डेक्सोना इंजेक्शन, हाइड्रोकार्टिसोन इंजेक्शन, एंटी रैबीज इंजेक्शन, ट्रामाडोल इंजेक्शन, मिथाइल कोबालामिन इंजेक्शन, ओनडेम इंजेक्शन और डीएनएस आईवी उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आयी है. इसके अलावा पांच और 10 एमएल की सिरिंज भी उपलब्ध नहीं है. इन दवाओं और सामग्रियों की जरूरत आपातकालीन विभाग सहित विभिन्न वार्डों में मरीजों के इलाज के दौरान पड़ती है.

चारों तरह के नेबुलाइजर सॉल्यूशन उपलब्ध नहीं

सांस लेने में परेशानी वाले मरीजों के इलाज को लेकर भी स्थिति चिंताजनक है. आपात स्थिति में नेबुलाइजर के माध्यम से मरीजों को आवश्यक सॉल्यूशन दिया जाता है. अस्पताल में लीवो सालबुटामोल, इप्राट्रोपियम ब्रोमाइड, बुडेसोनाइड और इटोफाइलीन-थियोफाइलीन समेत चार तरह के नेबुलाइजर सॉल्यूशन रखने का प्रावधान है. लेकिन फिलहाल चारों सॉल्यूशन उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आयी है.

गंभीर मरीजों के लिए नेबुलाइजेशन कई बार तत्काल उपचार का हिस्सा होता है. ऐसे में जरूरी सॉल्यूशन की अनुपलब्धता से इलाज में परेशानी और देरी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.

बच्चों के इलाज की व्यवस्था भी अधूरी

सदर अस्पताल के इंडोर और एसएनसीयू में भर्ती छोटे बच्चों के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाला पीडिया सेट भी उपलब्ध नहीं कराया गया है. बच्चों को बुखार में दी जाने वाली पैरासिटामोल सिरप की भी कमी बतायी जा रही है. नवजात और छोटे बच्चों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली आवश्यक सामग्री की उपलब्धता नहीं होने से अस्पताल की तैयारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

बाहर से दवा लिखने पर भी रोक

मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि अस्पताल में उपलब्ध नहीं होने वाली दवाओं को चिकित्सकों द्वारा बाहर से खरीदने के लिए लिखे जाने पर भी रोक है. चिकित्सकों का कहना है कि उन्हें बाहर की दवा लिखने का निर्देश नहीं है. ऐसे में अस्पताल में दवा उपलब्ध नहीं होने और बाहर से खरीदने की सलाह नहीं मिलने के बीच मरीज और उनके परिजन परेशान हो रहे हैं.

सरकारी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे मरीजों को नि:शुल्क दवा उपलब्ध कराना व्यवस्था की जिम्मेदारी है. ऐसे में जरूरी दवाओं की कमी से मरीजों को परेशानी होने के साथ ही नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं.

दावे और हकीकत के बीच अंतर

स्वास्थ्य विभाग की आवश्यक औषधि सूची में सरकारी अस्पतालों के लिए बड़ी संख्या में दवाओं का प्रावधान है. लेकिन मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि जरूरत के समय दवा अस्पताल में उपलब्ध हो. आपात स्थिति में जरूरी दवा नहीं मिलने पर मरीजों के इलाज में परेशानी हो सकती है.

ऐसे में अस्पताल के स्टॉक की जांच कर जरूरत के अनुरूप दवाओं की खरीद और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की आवश्यकता है. मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर आने के बाद भी जरूरी दवाओं के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है.

क्या कहते हैं अधीक्षक

सदर अस्पताल के अधीक्षक ने बताया कि अस्पताल में कुछ दवाओं की कमी है.

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By अमरनाथ शर्मा

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