सीवान में वर्ण पहचान से पैराग्राफ लेखन तक पहुंचे बच्चे, समर कैंप में हर दिन कुछ नया सीख रहे 700 छात्र

Siwan News: प्रखंड के सभी 63 मध्य और उत्क्रमित मध्य विद्यालयों में समर कैंप का आयोजन किया जा रहा है. इस अभियान के तहत वर्ग पांच और छह के करीब 700 कमजोर बच्चों को बुनियादी भाषा और गणितीय ज्ञान सिखाए जा रहे हैं.

सीवान से आनंद मिश्र की रिपोर्ट
Siwan News: सीवान जिले के बड़हरिया प्रखंड के सरकारी विद्यालयों में चल रहे समर कैंप ने शिक्षा के क्षेत्र में नई उम्मीद जगाई है. महज 15 दिनों के भीतर कई बच्चे वर्ण पहचान से आगे बढ़कर वाक्य और अब अनुच्छेद (पैराग्राफ) लिखने लगे हैं, जबकि गणित में गिनती सीखने वाले छात्र जोड़-घटाव से आगे बढ़कर गुणा तक पहुंच गए हैं. समर कैंप के इस बदलाव ने अभिभावकों और शिक्षकों दोनों को उत्साहित कर दिया है.

63 स्कूलों में चल रहा समर कैंप

प्रखंड के सभी 63 मध्य और उत्क्रमित मध्य विद्यालयों में समर कैंप का आयोजन किया जा रहा है. इस अभियान के तहत वर्ग पांच और छह के करीब 700 कमजोर बच्चों को बुनियादी भाषा और गणितीय ज्ञान सिखाकर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.

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वर्ण ज्ञान से शुरू हुआ सफर, अब बच्चे लिख रहे हैं पैराग्राफ

समर कैंप की सबसे बड़ी उपलब्धि यह मानी जा रही है कि जिन बच्चों को पहले वर्ण पहचानने में कठिनाई होती थी, वे अब छोटे-छोटे वाक्यों को जोड़कर सार्थक अनुच्छेद लिखने लगे हैं. शिक्षक बच्चों को संज्ञा, सर्वनाम और वाक्य निर्माण की बुनियादी जानकारी देकर स्वयं पैराग्राफ तैयार करने का अभ्यास करा रहे हैं.

खेल-खेल में सीख रहे गुणा

नोडल शिक्षक ज्ञानभूषण सिंह ने बताया कि बच्चों को रटने की बजाय गतिविधि आधारित शिक्षा दी जा रही है. गणित के कठिन लगने वाले पहाड़े और गुणा को अब पहेलियों तथा कंचों के माध्यम से रोचक बनाया गया है. इसी कारण बच्चे तेजी से सीख रहे हैं और पढ़ाई में रुचि दिखा रहे हैं.

69 टोला सेवक, तालीमी मरकज शिक्षक और स्वयंसेवक संभाल रहे जिम्मेदारी

समर कैंप को सफल बनाने में 69 टोला सेवकों, तालीमी मरकज शिक्षकों और स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका है. सभी मिलकर बच्चों को सरल और मनोरंजक तरीकों से पढ़ाने में जुटे हैं, जिससे सीखने की प्रक्रिया आनंददायक बन गई है.

सिर्फ पढ़ाई नहीं, योग, चित्रकला और नैतिक शिक्षा भी बनी आकर्षण का केंद्र

बीईओ राजीव कुमार पांडेय ने बताया कि समर कैंप में केवल भाषा और गणित ही नहीं, बल्कि चित्रकला, योग, नैतिक शिक्षा और अन्य रचनात्मक गतिविधियों को भी शामिल किया गया है. इन गतिविधियों से बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा मिल रहा है.

मोबाइल और टीवी से बढ़ी दूरी

समर कैंप का एक बड़ा सकारात्मक प्रभाव यह भी देखने को मिला है कि बच्चों का स्क्रीन टाइम कम हुआ है. फोन और टीवी से दूरी बढ़ने के कारण बच्चे अधिक समय सीखने, खेलने और नई गतिविधियों में भाग लेने में लगा रहे हैं, जो उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक साबित हो रहा है.

कला, संगीत और खेलों से निखर रही छिपी प्रतिभाएं

ग्रीष्मकालीन शिविर में कला, संगीत, नृत्य, क्राफ्ट और आउटडोर खेल जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की रचनात्मकता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ रहा है और नई प्रतिभाएं सामने आ रही हैं. शिक्षकों का कहना है कि अन्य बच्चों के साथ मिलकर समय बिताने से विद्यार्थियों में निर्णय लेने की क्षमता, टीमवर्क और सामाजिकता की भावना मजबूत हो रही है. समर कैंप बच्चों के व्यक्तित्व विकास का प्रभावी मंच बनकर उभरा है.

पहाड़पुर स्कूल के बच्चे बने मिसाल, खेल-खेल में सीख रहे गणित और भाषा

मध्य विद्यालय पहाड़पुर में स्वयंसेवक सरिता कुमारी और गीता कुमारी बच्चों को खेल-खेल में गुणा और भाषा ज्ञान सिखा रही हैं. रानी, सुशांत, सलोनी, सरस्वती, प्रदीप, राजन, रागिनी, अंशु, प्रकाश, प्रिंस, विशाल और दीपु जैसे छात्र अब शब्दों को जोड़कर वाक्य और अनुच्छेद तैयार करने लगे हैं.

समर कैंप से बदल रही शिक्षा की तस्वीर

शिक्षा विभाग का मानना है कि समर कैंप बच्चों को पढ़ाई के तनाव से मुक्त कर रचनात्मकता, आत्मविश्वास और सीखने की नई ऊर्जा दे रहा है. सीमित समय में मिले सकारात्मक परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि सही मार्गदर्शन और गतिविधि आधारित शिक्षा से कमजोर छात्र भी तेजी से आगे बढ़ सकते हैं.

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Published by: Sakshi kumari

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