Siwan News: बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू हुए कई वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन मैरवा थाना परिसर की स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है. शराबबंदी अभियान के दौरान जब्त किए गए सैकड़ों वाहन वर्षों से थाना परिसर में खड़े हैं. समय पर नीलामी नहीं होने के कारण पूरा परिसर कबाड़खाने और जंगल में तब्दील होता जा रहा है.
इस स्थिति से न केवल थाना परिसर की साफ-सफाई और सुंदरता प्रभावित हुई है, बल्कि यहां तैनात पुलिसकर्मियों की सुरक्षा भी चिंता का विषय बन गई है.
झाड़ियों से घिरा थाना परिसर, जहरीले जीवों का बढ़ा खतरा
थाना परिसर के बड़े हिस्से में जब्त वाहनों का अंबार लगा हुआ है. वर्षों से खड़े इन वाहनों के बीच घास और झाड़ियां उग आई हैं, जिससे पूरा परिसर जंगल जैसा दिखाई देने लगा है.
स्थानीय लोगों के अनुसार यहां जहरीले सांप, बिच्छू और अन्य खतरनाक जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है. थाना परिसर में रहने वाले पुलिसकर्मी और उनके परिवार हर समय भय के माहौल में रहने को मजबूर हैं.
थाना प्रभारियों के लिए भी बनी बड़ी चुनौती
सूत्रों के अनुसार जब्त वाहनों की बड़ी संख्या और उनके रिकॉर्ड का रखरखाव थाना प्रभारियों के लिए भी परेशानी का कारण बन गया है. नए थाना प्रभारी के पदभार संभालते ही उन्हें वर्षों पुराने जब्त वाहनों के रिकॉर्ड और उनकी स्थिति का प्रबंधन करना पड़ता है.
कई वाहन अब पूरी तरह कबाड़ बन चुके हैं और उनके कई पार्ट्स भी गायब हो चुके हैं, जिससे उनकी नीलामी की प्रक्रिया और अधिक जटिल हो गई है.
स्थानीय लोगों ने उठाई नीलामी की मांग
स्थानीय नागरिकों और पुलिसकर्मियों का कहना है कि यदि समय पर इन वाहनों की नीलामी कर दी जाती, तो थाना परिसर की यह स्थिति नहीं होती. उनका कहना है कि कबाड़ बन चुके वाहनों से सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है और थाना परिसर की सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है.
प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग
पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि मैरवा थाना परिसर में वर्षों से पड़े जब्त वाहनों की जल्द नीलामी कराई जाए. साथ ही परिसर की साफ-सफाई कर इसे सुरक्षित बनाया जाए, ताकि पुलिसकर्मी और उनके परिवार भयमुक्त वातावरण में रह सकें.
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