Siwan News (विवेक कुमार सिंह की रिपोर्ट): सीवान नगर परिषद सीवान के पूर्व कार्यपालक पदाधिकारी अनुभूति श्रीवास्तव को लंबे समय बाद बड़ी राहत मिली है. बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग ने उन्हें निलंबन से मुक्त करते हुए तत्काल प्रभाव से बहाल करने का आदेश जारी कर दिया है. यह कार्रवाई पटना हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में की गई है. विभाग ने उनके नए पदस्थापन को लेकर भी आवश्यक प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है. अनुभूति श्रीवास्तव का नाम पिछले कुछ वर्षों में आय से अधिक संपत्ति और आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की कार्रवाई को लेकर लगातार सुर्खियों में रहा है.
हाईकोर्ट के निर्देश पर विभाग ने जारी किया बहाली आदेश
नगर विकास एवं आवास विभाग ने 4 अक्टूबर 2025 को जारी अधिसूचना के माध्यम से अनुभूति श्रीवास्तव को निलंबित किया था. निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विभागीय स्तर पर निर्धारित किया गया था. इसके बाद मामला पटना हाईकोर्ट पहुंचा. अवमानना वाद एमजेसी संख्या-53/2026, जो सीडब्ल्यूजेसी संख्या-16714/2025 से उत्पन्न हुआ था, में 14 मई को पारित आदेश के आलोक में अनुभूति श्रीवास्तव ने विभाग के समक्ष अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत किया. विभाग द्वारा उपलब्ध तथ्यों और अभ्यावेदन पर विचार करने के बाद उन्हें निलंबन से मुक्त करने का निर्णय लिया गया.
नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति के बाद यह आदेश जारी किया गया है. आदेश की प्रति जिलाधिकारी सीवान, नगर परिषद सीवान सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई है.
आय से अधिक संपत्ति मामले में चर्चा में रहे थे अनुभूति श्रीवास्तव
गौरतलब है कि नगर परिषद सीवान में कार्यकाल के दौरान अनुभूति श्रीवास्तव कई विवादों और जांचों को लेकर चर्चा में रहे थे. अगस्त 2025 में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने आय से अधिक संपत्ति मामले में उनके सीवान, पटना और उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी.
जांच एजेंसी के अनुसार तलाशी के दौरान कुल 6.66 लाख रुपये नकद बरामद हुए थे. इनमें लखनऊ स्थित आवास से 1.92 लाख रुपये नकद और करीब 400 ग्राम आभूषण, सीवान स्थित आवास से 1.25 लाख रुपये नकद तथा पटना स्थित आवास से 3.49 लाख रुपये नकद मिलने की बात सामने आई थी.
ईओयू की जांच में यह भी दावा किया गया था कि अनुभूति श्रीवास्तव एवं उनके परिजनों के नाम पर 21 बैंक खातों में करीब 1.48 करोड़ रुपये जमा होने की जानकारी मिली थी. इसके अलावा लखनऊ में खरीदी गई फार्च्यूनर और इनोवा जैसी महंगी गाड़ियों, जमीन, फ्लैट तथा अन्य निवेश से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए गए थे. जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया था कि लखनऊ में शेल कंपनियों के माध्यम से अवैध कमाई निवेश किए जाने के संकेत मिले हैं.
2021 में भी एसवीयू ने की थी कार्रवाई
मालूम हो कि अनुभूति श्रीवास्तव ने वर्ष 2013 में नगर विकास एवं आवास विभाग में योगदान दिया था. इससे पहले वर्ष 2021 में भी स्पेशल विजिलेंस यूनिट (एसवीयू) ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में कार्रवाई की थी. जांच एजेंसियों के अनुसार उनके खिलाफ आय से करीब 79 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया गया था. हालांकि, नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना केवल उनके निलंबन समाप्त करने से संबंधित है.
