सीवान नगर परिषद बन सकता है नगर निगम, मैरवा और महाराजगंज को मिल सकता है नगर परिषद का दर्जा

सीवान जिले के नगर निकायों में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है. मैरवा और महाराजगंज नगर पंचायत को नगर परिषद का दर्जा मिलने की संभावना है, जबकि सीवान नगर परिषद को नगर निगम बनाने की ओर अग्रसर है. इससे जिले के शहरी विकास को नई गति मिलेगी.

सीवान: जिले के शहरी विकास को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है. नगर विकास एवं आवास विभाग ने नगर निकायों के पुनर्गठन को लेकर सभी जिलों से 30 अगस्त तक प्रस्ताव मांगे हैं. प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर सीवान नगर परिषद को नगर निगम, जबकि मैरवा और महाराजगंज नगर पंचायत को नगर परिषद का दर्जा मिलने की संभावना बढ़ गई है. इसके अलावा जिले में नए नगर पंचायतों के गठन और पुराने नगर निकायों की सीमा विस्तार पर भी विचार किया जाएगा.

प्रधान सचिव ने डीएम को भेजा पत्र

नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर नगर निकायों के पुनर्गठन से संबंधित प्रस्ताव तैयार कर निर्धारित समय सीमा के भीतर भेजने का निर्देश दिया है. विभाग का कहना है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और आबादी के कारण कई नगर निकायों की मौजूदा सीमाएं अब पर्याप्त नहीं रह गई हैं.

सीमा विस्तार और विलय का भी बनेगा प्रस्ताव

विभाग ने निर्देश दिया है कि दो या अधिक नगर निकायों के विलय, शहर से सटे ग्रामीण क्षेत्रों को नगर निकाय में शामिल करने, नए नगर निकायों के गठन, नगर पंचायत को नगर परिषद तथा नगर परिषद को नगर निगम में अपग्रेड करने से संबंधित प्रस्ताव तैयार किए जाएं. इसके बाद विभागीय स्तर पर सभी प्रस्तावों की समीक्षा की जाएगी. पूरी प्रक्रिया बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 के प्रावधानों के तहत पूरी होगी.

सीवान नगर निगम बनने की उम्मीद बढ़ी

सीवान नगर परिषद लंबे समय से नगर निगम का दर्जा मिलने की उम्मीद लगाए हुए है. शहर की आबादी लगातार बढ़ रही है. नए मोहल्ले बस रहे हैं और नगर क्षेत्र का दायरा भी तेजी से विस्तारित हुआ है. नगर निगम बनने पर शहर को अधिक सरकारी सहायता, बेहतर आधारभूत सुविधाएं और बड़े विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन मिलने की संभावना है.

मैरवा और महाराजगंज को मिल सकता है नगर परिषद का दर्जा

मैरवा और महाराजगंज नगर पंचायत भी तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्र हैं. दोनों स्थानों पर आबादी और व्यावसायिक गतिविधियों में लगातार वृद्धि हो रही है. ऐसे में दोनों नगर पंचायतों को नगर परिषद का दर्जा मिलने की संभावना जताई जा रही है. वहीं शहरों से सटे ग्रामीण क्षेत्रों को भी संबंधित नगर निकायों में शामिल कर सीमा विस्तार का प्रस्ताव तैयार किया जा सकता है.

2025 में भी शुरू हुई थी प्रक्रिया

वर्ष 2025 में भी सरकार ने नगर निकायों के पुनर्गठन के लिए प्रस्ताव मांगे थे. हालांकि जनगणना-2027 की प्रक्रिया शुरू होने के कारण प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव पर रोक लगा दी गई थी. अब सरकार ने एक बार फिर इस प्रक्रिया को शुरू किया है. जिलों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा.

शहरी विकास को मिलेगी नई रफ्तार

यदि जिले से भेजे गए प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो पूरे सीवान जिले के शहरी विकास में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. इससे नागरिक सुविधाओं का विस्तार होगा. आधारभूत संरचना मजबूत होगी और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को नई गति मिलेगी.

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Author: Prabhat khabar news desk

Published by: Vivek Ranjan

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