Veterinary Services: सिसवन प्रखंड क्षेत्र में पशु चिकित्सा व्यवस्था इन दिनों प्रभावित है. प्रखंड में पदस्थापित सरकारी पशु चिकित्सक को आठ अलग-अलग स्थानों के पशु चिकित्सा केंद्रों का प्रभार सौंपे जाने से पशुपालकों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने में परेशानी हो रही है. एक चिकित्सक के जिम्मे कई केंद्रों की जिम्मेदारी होने के कारण सभी स्थानों पर नियमित रूप से चिकित्सक की मौजूदगी संभव नहीं हो पा रही है.
आपात स्थिति में निजी इलाज कराने को मजबूर पशुपालक
पशुओं के बीमार होने या आपात स्थिति में सरकारी चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने पर पशुपालकों को निजी स्तर पर इलाज कराना पड़ रहा है. इससे उन्हें अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ रहा है. पशुपालकों का कहना है कि सरकारी पशु चिकित्सा केंद्रों पर समय से सुविधा उपलब्ध हो, तो उन्हें काफी राहत मिल सकती है.
इलाज और टीकाकरण की व्यवस्था प्रभावित
जिप सदस्य ब्रजेश सिंह ने कहा कि पशुओं के इलाज, टीकाकरण और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए ग्रामीण सरकारी पशु चिकित्सालयों पर निर्भर रहते हैं. लेकिन चिकित्सकों की कमी के कारण व्यवस्था प्रभावित हो रही है. एक चिकित्सक को कई केंद्रों का प्रभार देने से किसी एक स्थान पर नियमित चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा है.
उन्होंने संबंधित विभाग से पर्याप्त संख्या में पशु चिकित्सकों की तैनाती करने और सभी पशु चिकित्सा केंद्रों पर नियमित चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है.
पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा
स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में पशुपालन लोगों की आय का महत्वपूर्ण जरिया है. ऐसे में पशुओं के इलाज, टीकाकरण और अन्य जरूरी सेवाओं की उपलब्धता बेहद जरूरी है. पशु चिकित्सा व्यवस्था मजबूत होने से पशुपालकों को समय पर उपचार मिल सकेगा और उन्हें निजी चिकित्सकों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
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