Saryu River Flood : सरयू नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर ने तटवर्ती इलाकों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है. नदी का जलस्तर लगातार चौथे दिन भी खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है. निचले इलाकों में बाढ़ का पानी प्रवेश करने लगा है, जिससे धान समेत अन्य खरीफ फसलों के नुकसान की आशंका बढ़ गई है.
वहीं, सरयू के बढ़ते जलस्तर से गोगरा तटबंध पर भी दबाव बढ़ने की बात कही जा रही है. जल संसाधन विभाग की ओर से सोमवार को जारी बुलेटिन के अनुसार, सरयू नदी का वर्तमान जलस्तर 61.33 मीटर दर्ज किया गया है. यह चेतावनी स्तर से 1.51 मीटर और खतरे के निशान से 51 सेंटीमीटर ऊपर है.
जेई बोले-उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया
जेई शुभम सिंह ने बताया कि नदी के जलस्तर में इस तरह का उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है. फिलहाल किसी बड़े खतरे की स्थिति नहीं है और विभाग की ओर से लगातार जलस्तर की निगरानी की जा रही है.
वहीं, तटवर्ती क्षेत्रों के ग्रामीणों का कहना है कि पिछले चार दिनों से नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है. निचले इलाकों में पानी प्रवेश करने लगा है. बढ़ते जलस्तर के कारण कई स्थानों पर धान की फसल पानी में डूब गई है. इसके अलावा मक्का, मूंगफली, बाजरा, अरहर और मूंग की फसलों को भी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है.
हर साल 350 घरों पर मंडराता है बाढ़ का खतरा
सरयू नदी में प्रत्येक वर्ष आने वाली बाढ़ से खेती योग्य भूमि और निचले इलाकों में बसे लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. नदी किनारे स्थित सोहगरा, सोनहुला, श्रीकरपुर, गोहरुआ, गुठनी, योगियाडीह, तिरबलुआ, ग्यासपुर, बलुआ, पांडेयपार, मैरिटार, दरौली, नरौली, केवटलिया, डूमरहर, अमरपुर, गंगपुर और सिसवन के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंच जाता है.
ग्रामीणों के अनुसार, प्रत्येक वर्ष करीब 350 घरों पर बाढ़ का खतरा मंडराता रहता है. बाढ़ के साथ-साथ नदी का कटाव भी लोगों के लिए गंभीर समस्या बना हुआ है.
कटाव निरोधी कार्य में लापरवाही का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रत्येक वर्ष नदी के कटाव से बड़े पैमाने पर नुकसान होने के बावजूद विभाग समय रहते कटाव निरोधी कार्य पूरा नहीं करता है. पूर्व विधायक सत्यदेव राम ने जल संसाधन विभाग पर सरकारी मापदंडों की अनदेखी का आरोप लगाया.
उन्होंने कहा कि विभागीय लापरवाही का खामियाजा मजदूरों, गरीबों, किसानों और पिछड़े वर्ग के लोगों को भुगतना पड़ता है. उन्होंने अधिकारियों और ठेकेदारों पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि बाढ़ से पहले कटाव रोकने के लिए समय रहते ठोस और प्रभावी पहल की जानी चाहिए.
क्या कहते हैं कार्यपालक अभियंता
कार्यपालक अभियंता मदन चंद चौधरी ने बताया कि गुठनी से सिसवन तक सरयू नदी के आसपास के इलाकों की स्थिति फिलहाल सामान्य है. उन्होंने बताया कि एसडीओ और जेई को समय-समय पर बाढ़ एवं कटाव से संबंधित रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. विभाग नदी के जलस्तर और तटबंधों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है.
नेपाल में बाढ़ के बाद बढ़ने लगा सरयू का जलस्तर
नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के बाद सरयू नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के साथ बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. जलस्तर के आंकड़ों के अनुसार, 26 अगस्त को नदी का जलस्तर 61.08 मीटर दर्ज किया गया था. इसके बाद 27 अगस्त को 60.97 मीटर, 28 अगस्त को 60.77 मीटर, 29 और 30 अगस्त को 60.50 मीटर तथा 31 अगस्त को 60.60 मीटर दर्ज किया गया.
सितंबर माह में जलस्तर फिर बढ़ने लगा. एक सितंबर को 60.80 मीटर, दो सितंबर को 60.80 मीटर, तीन सितंबर को 61.04 मीटर, चार सितंबर को 61.12 मीटर, पांच सितंबर को 61.19 मीटर, छह सितंबर को 61.31 मीटर और सात सितंबर को 61.33 मीटर जलस्तर दर्ज किया गया.
विभागीय आंकड़ों के अनुसार सरयू नदी का चेतावनी स्तर 59.82 मीटर, जबकि खतरे का निशान 60.82 मीटर निर्धारित है. वर्तमान में नदी खतरे के निशान से 51 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है.
