Siwan News : चावल आपूर्ति में सुस्ती पर पांच प्रखंडों के बीसीओ का वेतन रोका

धान की खरीदारी के बाद चावल (सीएमआर) की आपूर्ति में लगातार हो रही लापरवाही अब अधिकारियों और समितियों पर भारी पड़ने लगी है. चावल आपूर्ति में सुस्ती पर पांच प्रखंडों के बीसीओ का वेतन रोक दिया गया है.

सीवान. धान की खरीदारी के बाद चावल (सीएमआर) की आपूर्ति में लगातार हो रही लापरवाही अब अधिकारियों और समितियों पर भारी पड़ने लगी है. बार-बार चेतावनी और समय सीमा बढ़ाने के बावजूद कई पैक्स समितियों और व्यापार मंडलों ने अब तक राज्य खाद्य निगम को चावल की आपूर्ति नहीं की है. इस उदासीनता को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ आदित्य प्रकाश ने सख्त रुख अपनाते हुए जिले के पांच प्रखंडों के सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों (बीसीओ) का वेतन तत्काल प्रभाव से रोकने का आदेश दिया है. इनमें रघुनाथपुर, दरौली, जीरादेई, आंदर और भगवानपुर हाट प्रखंड शामिल हैं. डीएम के निर्देश पर जिला सहकारिता पदाधिकारी सौरभ कुमार ने संबंधित आदेश जारी कर दिया है. आदेश में कहा गया है कि जब तक इन प्रखंडों की शत-प्रतिशत सीएमआर आपूर्ति राज्य खाद्य निगम को नहीं हो जाती, तब तक वेतन भुगतान पर रोक रहेगी. जिलाधिकारी की अध्यक्षता में 16 जुलाई को हुई समीक्षा बैठक में यह तथ्य सामने आया कि खरीफ विपणन मौसम 2024-25 के तहत जिले में कुल 2248 लॉट धान की खरीद की गयी है, लेकिन इनमें से 508 लॉट का चावल अब तक आपूर्ति नहीं किया गया है. यह सीधे तौर पर सरकार द्वारा तय की गई समय-सीमा और अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन है. डीएम ने इस पर गहरी नाराजगी जताई और आपूर्ति प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया. रघुनाथपुर प्रखंड की पैक्स समितियों ने अब तक 63.72 लॉट, दरौली ने 44.87 लॉट, जीरादेई ने 42.82 लॉट, आंदर ने 39.00 लॉट और भगवानपुर हाट ने 37.00 लॉट चावल की आपूर्ति नहीं की है. इस लापरवाही से न केवल राज्य खाद्य निगम को नुकसान हो रहा है, बल्कि खाद्य सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है. जारी पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पांचों प्रखंडों के सहकारिता प्रसार पदाधिकारी यह सुनिश्चित करें कि उनके क्षेत्र की सभी पैक्स समितियां और व्यापार मंडल पांच अगस्त तक शत-प्रतिशत चावल की आपूर्ति कर दें. यदि निर्धारित समय सीमा तक आपूर्ति नहीं हुई, तो आगे और भी कठोर कार्रवाई की जायेगी. जिला प्रशासन का मानना है कि किसानों से खरीदे गए धान का समुचित निष्पादन और चावल की समय पर आपूर्ति राज्य की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है. किसी भी स्तर पर लापरवाही, सुस्ती या अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. डीएम ने स्पष्ट कर दिया है कि अब सिर्फ रिपोर्ट या बहाने नहीं, बल्कि नतीजे दिखने चाहिए. सभी संबंधित अधिकारियों और समितियों को चेताया गया है कि वे अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लें, अन्यथा जवाबदेही तय करते हुए अगली कार्रवाई की जायेगी. प्रशासन का यह सख्त रुख जिले की अन्य लापरवाह इकाइयों के लिए भी चेतावनी है.

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